एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

Abraham Accords: क्या है अब्राहम एकॉर्ड्स, ट्रंप की इस मेगा डील पर पश्चिम एशिया में क्यों मची है हलचल?

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 26 May 2026 04:16 PM IST

सार

अब्राहम एकॉर्ड्स क्या है और क्यों पाकिस्तान और सऊदी अरब कर रहे हैं इसका विरोध? कौन-कौन से देश इसके सदस्य हैं और क्यों इसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है? आसान भाषा में समझें पूरा मामला।
विज्ञापन
अब्राहम एकॉर्ड - फोटो : amarujala.com
विज्ञापन

Next Article

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

पश्चिम एशिया में एक बार फिर कूटनीति का बाजार गर्म है और चर्चा के केंद्र में हैं अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप। ट्रंप एक ऐसी डील को आगे बढ़ाने में पूरी ताकत झोंक रहे हैं, जिसे लेकर कुछ देश तो उत्साहित हैं, लेकिन पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे प्रमुख देशों ने इसे लेकर साफ तौर पर असहमति जता दी है।

और पढ़ें
विज्ञापन
विज्ञापन


हम बात कर रहे हैं अब्राहम एकॉर्ड्स की। क्या है यह समझौता, कौन-कौन से देश इसके सदस्य हैं और क्यों इसे लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है? आइए इसे आसान भाषा में सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं।

सवाल: अब्राहम एकॉर्ड्स आखिर है क्या?

जवाब: आसान शब्दों में कहें तो यह 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता से शुरू किया गया एक समझौता है। इसका मुख्य उद्देश्य इस्राइल और अरब देशों के बीच कूटनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य करना है। पहले अरब देशों की यह शर्त हुआ करती थी कि जब तक फिलिस्तीन के मुद्दे का समाधान नहीं होता, वे इस्राइल को मान्यता नहीं देंगे। लेकिन इस समझौते ने पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए व्यापार, निवेश और रक्षा सहयोग को सबसे ऊपर रखा।

इस समझौते का नाम अब्राहम (इब्राहीम) के नाम पर रखा गया है, जो यहूदी धर्म, ईसाई धर्म और इस्लाम- तीनों प्रमुख धर्मों में एक साझा और सम्मानित पैगंबर या पूर्वज माने जाते हैं। इस नाम को चुनने का प्रतीक यह संदेश देना था कि ये देश साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के आधार पर क्षेत्र में शांति, भाईचारे और सहयोग की नई शुरुआत कर रहे हैं।

विज्ञापन

सवाल: वर्तमान में इस समझौते से कितने देश जुड़े हुए हैं?

जवाब: फिलहाल इस समझौते में छह देश शामिल हैं। इसकी शुरुआत 2020 में इस्राइल, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन के बीच हस्ताक्षर के साथ हुई थी। बाद में मोरक्को और सूडान भी इसका हिस्सा बने, और 2025 में कजाखस्तान ने भी औपचारिक रूप से इस समूह को ज्वाइन कर लिया।

सवाल: अभी अचानक से फिर इसकी चर्चा क्यों शुरू हो गई है?

जवाब: दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता को एक बड़ी क्षेत्रीय डील से जोड़ना चाहते हैं। उनका प्लान है कि जैसे ही ईरान के साथ कोई डील फाइनल हो, उसके तुरंत बाद सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्किये, मिस्र और जॉर्डन जैसे देश भी अब्राहम एकॉर्ड्स का हिस्सा बन जाएं। ट्रंप का दावा है कि इस समझौते से इसमें शामिल देशों में भारी आर्थिक और सामाजिक प्रगति हुई है।

सवाल: ट्रंप के इस प्रस्ताव का किन देशों ने विरोध किया है?

जवाब: पाकिस्तान इस प्रस्ताव को सार्वजनिक रूप से खारिज करने वाला पहला देश बन गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ ने साफ कर दिया है कि यह समझौता उनकी विचारधारा के खिलाफ है और वे इस्राइल पर भरोसा नहीं कर सकते। पाकिस्तान का कहना है कि 1967 से पहले की सीमाओं और पूर्वी यरुशलम को राजधानी बनाए बिना वे इस्राइल को मान्यता नहीं देंगे।
 
इसके अलावा, सऊदी अरब ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि जब तक फिलिस्तीन को एक स्वतंत्र राज्य का दर्जा मिलने का ठोस रास्ता नहीं बनता, तब तक वे इस्राइल को मान्यता नहीं देंगे। ईरान ने भी यह कहते हुए इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है कि वे 'नरसंहार' करने वाले शासन को मान्यता नहीं देंगे।

सवाल: आगे क्या होने की उम्मीद है?

जवाब: डोनाल्ड ट्रंप भले ही इसे पश्चिम एशिया के इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण डील मान रहे हों, लेकिन गाजा में चल रहे युद्ध और ईरान के साथ तनाव ने इस क्षेत्र के राजनीतिक माहौल को काफी उलझा दिया है। फिलहाल, जब तक ईरान के साथ प्रतिबंध हटाने और अन्य मुद्दों पर बातचीत सफल मुकाम तक नहीं पहुंचती, तब तक अब्राहम एकॉर्ड्स के विस्तार का भविष्य अधर में ही नजर आ रहा है।
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें