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परीक्षा में बांट दिया 50 की बजाय 70 अंकों का परचा

ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Wed, 11 May 2016 12:03 AM IST
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रूसा सीबीसीएस के तहत एचपीयू की यूजी परीक्षाओं में शनिवार को एक बड़ी चूक सामने आई है।
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रूसा सीबीसीएस के तहत एचपीयू की यूजी परीक्षाओं में शनिवार को एक बड़ी चूक सामने आई है। बीकॉम छठे सेमेस्टर की बिजनेस एन्वायरनमेंट की परीक्षा में नए पैटर्न के तहत सेट किया 70 नंबर प्रश्नपत्र ही वितरित कर दिया गया, जबकि यह परीक्षा पुराने पैटर्न यानी 50 अंकों की होनी थी।
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रूसा सीबीसीएस में पहले बैच के लिए अब तक पांचों सेमेस्टर में 50 अंकों की थ्योरी और 50 अंक की इंटरनल असेसमेंट की परीक्षा होती रही है। शनिवार को छठे सेमेस्टर की बिजनेस एन्वायरनमेंट परीक्षा में नए पैटर्न का प्रश्नपत्र ही वितरित कर दिया। इससे हजारों छात्रों को परेशान होना पड़ा।

अधिकतर परीक्षा केंद्रों में विद्यार्थियों ने इसको लेकर आपत्ति दर्ज करवाई। परीक्षा केंद्र अधीक्षकों से मामला उठाया और इस त्रुटि को सही करने या दोबारा से प्रश्नपत्र छपवाकर परीक्षा करवाने की मांग उठाई। बिजनेस एनवायरनमेंट मेजर (बीसीसी -0614) की परीक्षा के लिए पूर्व निर्धारित सिलेबस और अंक विभाजन के मुताबिक सिर्फ 50 अंक की लिखित परीक्षा के हिसाब से प्रश्नपत्र सेट किया जाना चाहिए था।
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पिछले सत्र में ही विवि ने यूजी कोर्स के विषयों में नया अंक विभाजन लागू जरूर किया है। यह छठे सेमेस्टर के लिए लागू नहीं होना था। चूंकि, यह पहला बैच था, इसकी आज तक सभी परीक्षाएं 50:50 लिखित परीक्षा और इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल परीक्षा के हिसाब से अंक विभाजित किए जाने थे। तीन घंटे की इस परीक्षा को कुल 70 अंकों में से सेट किया गया था। इसमें तीस अंक इंटरनल असेसमेंट और प्रैक्टिकल के लिए रखे हैं। परीक्षार्थियों ने विवि प्रशासन से इस गलती को सही करने की मांग की है।

यह था पूर्वनिर्धारित अंक विभाजन
विवि ने कॉमर्स के बिजनेस एन्वायरनमेंट विषय के लिए अलग से अंक विभाजन कर सिलेबस तय कि या था। इसमें पार्ट ए 18 अंक, पार्ट बी, सी, डी और ई पार्ट के आठ-आठ अंक तय किए गए थे। शनिवार को जो प्रश्नपत्र वितरित किया गया, उसमें अंक विभाजन ए पार्ट 10 जमा 20 अंक का और बी, सी, डी तथा ई पार्ट में दस दस अंक के प्रश्न पूछे थे। उधर, परीक्षा नियंत्रक डा. जेएस नेगी ने कहा कि इस बारे में लिखित में कोई शिकायत नहीं पहुंची हैं। अगर कोई ऐसी शिकायत आती है तो छात्र हित में निर्णय लिया जाएगा।
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