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वोट डालने की सजा, काट दी एक दिन की सैलरी

ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 08 May 2014 11:32 PM IST
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पीजीआई के कांट्रैक्ट कर्मचारियों को अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने की सजा मिल रही है। दस अप्रैल को घोषित छुट्टी होने के बावजूद कई कर्मचारियों की एक दिन की सैलरी काट दी गई है।
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इनमें वे कर्मचारी शामिल हैं, जो वोटिंग के दिन पीजीआई नहीं पहुंचे थे। पीजीआई और चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से दस अप्रैल के दिन छुट्टी के आदेश जारी किए गए थे। यहां तक न्यू ओपीडी का ब्लॉक भी बंद था।

एक दिन की सैलरी कटने से कर्मचारियों में काफी रोष है। उन्होंने इस बारे में डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट से मुलाकात की, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ भी नहीं मिला।
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अब कर्मचारी इस बारे में चुनाव आयोग से शिकायत करने का मन बना रहे हैं। जल्द ही आयोग को पत्र लिखकर शिकायत की जाएगी।

दस अप्रैल को लोकसभा चुनाव के लिए वोटिंग की गई थी। चुनाव से दो दिन पहले ही पीजीआई प्रशासन की ओर से छुट्टी घोषित कर दी गई थी, लेकिन कांट्रैक्ट कर्मचारियों को आदेश दिया गया कि वे हास्पिटल में मौजूद रहेंगे।

यदि नहीं आए तो उनकी सैलरी काट दी जाएगी। इससे घबराए कई कर्मचारी हास्पिटल पहुंचे तो कुछ ने एक दिन की सैलरी को देश के सबसे बड़े लोकतंत्र के लिए न्यौछावर करने का फैसला लिया।

कर्मचारियों ने पहले वोट डालना ही मुनासिब समझा। वोट डालने के कारण वे पीजीआई नहीं पहुंच पाए। दो दिन पहले जब उन्हें सैलरी दी गई तो दस अप्रैल की सैलरी रोक दी गई।

सैलरी कम आते ही कर्मचारियों का चेहरा मायूसी से लटक गया। कर्मचारियों ने इस बारे में पीजीआई प्रशासन से शिकायत की थी तो उनसे कहा गया कि पत्र लिखे और जल्द ही कांट्रैक्टर से बात की जाएगी।

कर्मचारी यूनियन का कहना है कि यह सरासर चुनाव आयोग की उल्लंघना है। इस बारे में चुप नहीं बैठेंगे। इमरजेंसी सेवा में लगे रेगुलर कर्मचारी को छुट्टी दी जा रही है और उन्हें सैलरी भी मिल रही है।

केशव सिक्योरिटी के मैनेजर आनंद आर्य मिश्रा ने बताया कि पीजीआई प्रशासन ने निर्देश दिया है कि जो लोग वोट डालने गए थे, उनके वोटर आईडी कार्ड की फोटोकापी दी जाए। जो कर्मचारी हमे पास फोटो कापी देगा, उसकी सैलरी दे दी जाएगी।
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