लोकसभा चुनाव से पहले चंडीगढ़ के सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवारों की हार ने कांग्रेस के लिए चिंता बढ़ा दी है।
इस चुनाव ने यह संकेत दे दिए हैं कि कांग्रेस के अंदर भी फूट है और इसका सीधा लाभ भाजपा को मिल रहा है। इस चुनाव में कांग्रेस के ही कुछ पार्षदों ने बगावत दिखाते हुए भाजपा के उम्मीदवारों के जीता दिया।
कांग्रेस के दो उम्मीदवारों की हार से चाहे स्थानीय सांसद पवन कुमार बंसल को बड़ा झटका लगा है, लेकिन बंसल के सामने कांग्रेस की असलियत भी आ गई है, जो लोकसभा चुनाव से पहले जाननी बेहद जरूरी थी।
कांग्रेस अब इस प्रयास में जुटी है कि किन पार्षदों ने बगावत दिखाते हुए भाजपा के उम्मीदवारों को वोट डाले हैं। कांग्रेस को इसका अहसास तो पहले से था, लेकिन यह नहीं सोचा था कि इससे भाजपा को इतना बड़ा फायदा मिलेगा।
सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के पदों पर कांग्रेस के उम्मीदवारों को पराजित करने की साजिश कुछ कांग्रेस के ही पार्षदों ने रची थी। बसपा के उम्मीदवारों को कांफिडेंस में लिया गया।
यह सुनिश्चित कर लिया गया था कि डिप्टी मेयर और सीनियर डिप्टी मेयर के चुनाव में कौन-किसे वोट डालेगा। भाजपा चंडीगढ़ के अध्यक्ष संजय टंडन ने पिछले तीन दिनों से अपने दो उम्मीदवारों को जिताने के लिए काफी प्रयास किया और इस जीत से उन्होंने चंडीगढ़ में अपनी मजबूती को दिखा दिया।
भाजपा के भीतर कलह का फायदा कांग्रेस को मिलता रहा है। अब कांग्रेस के अंदर भी यही स्थिति पैदा हो रही है। कांग्रेस में ही बंसल के विरोधियों की संख्या बढ़ रही है। इनमें कुछ तो बंसल के काफी करीबी हैं।
लोकसभा चुनाव में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। ऐसे में कांग्रेस को चंडीगढ़ में अपनी सीट बचाने के लिए सबसे पहले उन पार्षदों की पहचान करनी होगी जो कि कांग्रेस के ही विरोध में उतर आए हैं।