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प्रॉपर्टी डीलरों का खेल: चंडीगढ़ के करीब बसने का सपना पड़ सकता महंगा, दो साल पहले जहां थे खेत, वहां कट चुके प्लॉट

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 27 Mar 2022 05:25 PM IST

सार

प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से अवैध रूप से प्लाटिंग तो की जा रही है लेकिन इन कॉलोनियों में न तो पार्क के लिए स्थान होता है और न ही बच्चों के लिए खेल का मैदान। सीवर भी अस्थायी होता है।
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मार्च 2022 की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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सिटी ब्यूटीफुल के करीब बसने का सपना दिखाकर भोले-भाले लोगों को खेती की जमीनें बेची जा रही हैं। यह खेल चंडीगढ़ की सीमा से महज 10 कदम की दूरी पर चल रहा है। दो साल पहले मलोया से सटे पंजाब के झामपुर में जहां लहलहाते खेत थे, वहां अब अवैध तरीके से प्लॉट कटने के साथ कुछ घर भी बन चुके हैं। हैरानी की बात है कि यह सब कुछ दिन के उजाले में हो रहा है लेकिन अधिकारी सो रहे हैं। 

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घर खरीदना एक परिवार के लिए सबसे महंगा सौदा होता है, जिसे वह अपनी जिंदगी की जमा-पूंजी लगाकर खरीदता है। चंडीगढ़ में जमीनों के दाम बेहद ज्यादा होने की वजह से लोग पेरीफेरी में जमीन देखते हैं। प्रॉपर्टी डीलरों को भी यह बात अच्छे से मालूम है, इसलिए वह चंडीगढ़ के करीब की सभी जमीनों को रिहायशी इलाकों व कॉलोनियों में बदल रहे हैं। 

अमर उजाला ने चंडीगढ़ के मलोया से सटे पंजाब के झामपुर की कुछ सैटेलाइट तस्वीरें हासिल की हैं। ये तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे दो साल के अंदर खेती की जमीनों पर घर बन गए। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि फरवरी 2020 में जहां लहलहाते खेत थे, मार्च 2022 में प्लॉट कट चुके हैं और मकान बन गए हैं। लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद था तो प्रॉपर्टी डीलर बहुत तेजी से काम कर रहे थे। अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में पाया था कि वहां जेसीबी चल रही है और जमीनों को समतल किया जा रहा है। 

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मार्च 2020 की तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
इन कॉलोनियों की न तो रेरा अप्रूवल, न ही प्रोजेक्ट प्लान 
चंडीगढ़ के नामी प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कमल गुप्ता ने बताया कि ऐसी जगहों पर लोगों को जमीन या घर बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। चंडीगढ़ के पास बसने का सपना बेचा जाता है। इन कॉलोनियों की न तो रेरा अप्रूवल होती है और न ही कोई प्रोजेक्ट प्लान होता है। यहां दो से चार मरला के प्लॉट काटे जाते हैं और लोअर मिडिल क्लास लोगों को बेचा जाता है।

यहां जमीन या फ्लैट लेना बहुत खतरनाक है, क्योंकि सरकार कभी भी अधिग्रहण कर सकती है या फिर इन्हें तोड़ा जा सकता है। यह खतरा हमेशा बना रहता है। जो बैंक लोन देते हैं, वह निजी होते हैं और काफी ज्यादा ब्याज दर भी होती है। लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी सुरक्षित जगह पर लगानी चाहिए। बैंक से लोन, करीबियों से उधार लेकर कोई घर बना भी ले लेकिन टूटने का खतरा हमेशा बना रहेगा। 

रजिस्ट्री के बाद बदल जाती है सड़क की चौड़ाई 
प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से अवैध रूप से प्लाटिंग तो की जा रही है लेकिन इन कॉलोनियों में न तो पार्क के लिए स्थान होता है और न ही बच्चों के लिए खेल का मैदान। सीवर भी अस्थायी होता है। प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से पहले तो 20 फुट का रास्ता नक्शे में दिखाया जाता है लेकिन जब प्लाट की रजिस्ट्री हो जाती है तो खरीदार को महज यह रास्ता 15 फुट का या उससे कम का ही दिखाई देता है जिसके चलते खरीदार अपने आपको ठगा महसूस करने लगता है।

अवैध कॉलोनियों पर गमाडा की नजर 
गमाडा की नजर भी अब इन अवैध कालोनियों पर पड़ गई है। गमाडा के एक्सईएन हरप्रीत सिंह ने कहा कि टीमें लगातार झामपुर व उन इलाकों की पहचान कर रही हैं, जहां अवैध रूप से कॉलोनियां काटी जा रही हैं और अवैध निर्माण किया जा रहा है। इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। झामपुर में शनिवार को भी कार्रवाई की है और पिछले 15 दिनों में 9 अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया गया है।
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