इन कॉलोनियों की न तो रेरा अप्रूवल, न ही प्रोजेक्ट प्लान
चंडीगढ़ के नामी प्रॉपर्टी कंसल्टेंट कमल गुप्ता ने बताया कि ऐसी जगहों पर लोगों को जमीन या घर बिल्कुल नहीं लेना चाहिए। चंडीगढ़ के पास बसने का सपना बेचा जाता है। इन कॉलोनियों की न तो रेरा अप्रूवल होती है और न ही कोई प्रोजेक्ट प्लान होता है। यहां दो से चार मरला के प्लॉट काटे जाते हैं और लोअर मिडिल क्लास लोगों को बेचा जाता है।
यहां जमीन या फ्लैट लेना बहुत खतरनाक है, क्योंकि सरकार कभी भी अधिग्रहण कर सकती है या फिर इन्हें तोड़ा जा सकता है। यह खतरा हमेशा बना रहता है। जो बैंक लोन देते हैं, वह निजी होते हैं और काफी ज्यादा ब्याज दर भी होती है। लोगों को अपने जीवन भर की पूंजी सुरक्षित जगह पर लगानी चाहिए। बैंक से लोन, करीबियों से उधार लेकर कोई घर बना भी ले लेकिन टूटने का खतरा हमेशा बना रहेगा।
रजिस्ट्री के बाद बदल जाती है सड़क की चौड़ाई
प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से अवैध रूप से प्लाटिंग तो की जा रही है लेकिन इन कॉलोनियों में न तो पार्क के लिए स्थान होता है और न ही बच्चों के लिए खेल का मैदान। सीवर भी अस्थायी होता है। प्रॉपर्टी डीलरों की ओर से पहले तो 20 फुट का रास्ता नक्शे में दिखाया जाता है लेकिन जब प्लाट की रजिस्ट्री हो जाती है तो खरीदार को महज यह रास्ता 15 फुट का या उससे कम का ही दिखाई देता है जिसके चलते खरीदार अपने आपको ठगा महसूस करने लगता है।
अवैध कॉलोनियों पर गमाडा की नजर
गमाडा की नजर भी अब इन अवैध कालोनियों पर पड़ गई है। गमाडा के एक्सईएन हरप्रीत सिंह ने कहा कि टीमें लगातार झामपुर व उन इलाकों की पहचान कर रही हैं, जहां अवैध रूप से कॉलोनियां काटी जा रही हैं और अवैध निर्माण किया जा रहा है। इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है। झामपुर में शनिवार को भी कार्रवाई की है और पिछले 15 दिनों में 9 अवैध कॉलोनियों को ध्वस्त किया गया है।