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ब्रेन स्ट्रोक होते ही बज उठेगी फोन की घंटी

अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 29 Oct 2013 01:57 PM IST
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ब्रेन स्ट्रोक की स्थिति में पल-पल का समय मरीज के लिए काफी उपयोगी होता है। जरा सी देरी उसके लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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इसी को ध्यान में रखते हुए पीजीआई ने 333 कोड स्ट्रोक नाम का एक नया सिस्टम लॉन्च किया है। दावा है कि यह सिस्टम मरीजों की जान बचाने में काफी अहम साबित होगा।

पीजीआई के एडिशनल प्रोफेसर धीरज खुराना व असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. मनोज गोयल ने बताया कि पीजीआई में एक स्ट्रोक टीम काम करती है।

कई बार मरीज अचानक इमरजेंसी में दाखिल होता है या फिर पीजीआई के किसी ब्लॉक में एडमिट मरीज को स्ट्रोक आ जाता तो सभी डॉक्टरों को मरीज के बारे में मैसेज दे पाना मुश्किल होता है।
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एक-एक करके उन्हें फोनकर सूचना दी जाती है, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। जैसे ही पीजीआई में मरीज दाखिल होगा तो कोई भी हेल्थ वर्कर या नर्स लैंडलाइन फोन से 333 नंबर मिलाएगा तो स्ट्रोक टीम से संबंधित न्यूरोलाजिस्ट, न्यूरोडायलोलाजिस्ट व स्पेशलिस्ट नर्स के पास मैसेज पहुंच जाएगा।

मैसेज पहुंचते ही टीम अलर्ट हो जाएगी और सभी मरीज के पास पहुंच जाएंगे। डॉ. धीरज खुराना ने बताया कि यह सुविधा अब तक पूरे भारत में कहीं नहीं है। विदेशों में भी बहुत कम जगह यह सुविधा है।

भार्गव आडिटोरियम में वर्ल्ड स्ट्रोक डे के उपलक्ष्य पर कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम में पीजीआई के डायरेक्टर योगेश चावला व आईजी आरपी उपाध्याय भी मौजूद रहे। इस मौके पर आए लोगों को स्ट्रोक के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

पुलिस व होटलर जागरूक करेंगे
पीजीआई की ओर से स्ट्रोक के खिलाफ छेड़े गए अभियान में यूटी पुलिस, पीयू, सिटको के होटल, ताज व जेडब्ल्यू मेरिएट साथ देंगे। यह अभियान 31 अक्तूबर तक चलेगा।

ये सभी स्ट्रोक के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे। अभियान में इनकी काफी बड़ी भागीदारी होगी। होटल में मैन्यू से पहले आपको ब्रेन स्ट्रोक से संबंधित पंफलेट दिया जाएगा।

डॉ. धीरज का कहना है कि इन सभी को अभियान में जुटाने का एक ही मकसद है कि  सभी वर्ग को स्ट्रोक के प्रति जागरूक किया जा सके।

हार्ट से पीड़ित मरीजों में ज्यादा संभावना
पीजीआई की डॉक्टर भावना कुमारी की नई स्टडी के मुताबिक, हार्ट से पीड़ित मरीजों में स्ट्रोक की संभावना सबसे ज्यादा होती है। उन्होंने 50 मरीजों पर एक स्टडी की है।

इनमें 70 प्रतिशत ऐसे मरीज थे, जिनमें हार्ट की बीमारी थी, जबकि 35 प्रतिशत ऐसे मरीज थे जो हार्ट की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने बताया कि जिन लोगों में हार्ट संबंधित शिकायत हो जाती तो उनमें ब्रेन स्ट्रोक की संभावना ज्यादा रहती है।

चंडीगढ़ व पंजाब में नहीं है इलाज फ्री
पीजीआई के विशेषज्ञों ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक का इलाज काफी महंगा होता है। दिल्ली, हिमाचल व हरियाणा की इमरजेंसी में ब्रेन स्ट्रोक का इलाज मुफ्त में मुहैया कराया जाता है, लेकिन यूटी व पंजाब में ऐसी सुविधा नहीं है।

यूटी एडमिनिस्ट्रेशन व पंजाब सरकार को चाहिए वह भी अपने सरकारी अस्पताल की इमरजेंसी में मुफ्त इलाज मुहैया कराए।
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