धीरे-धीरे ऐसा लगने लगा है कि कांग्रेस छाप सेक्यूलरिज्म के बुरे दिन आ गए हैं। कांग्रेस के लिए यह बुरी खबर होगी, पर भारत के लिए यह बहुत ही शुभ है। यहां स्पष्ट कर दूं कि असली सेक्यूलरिज्म को मैं बहुत अच्छा मानती हूं। मेरा मानना है कि राजनेताओं और सरकारों को भी धर्म-मजहब से दूर रहना चाहिए, ताकि कभी किसी समुदाय को ऐसा न लगे कि सरकारी नीतियों में पक्षपात है। यही असली सेक्यूलरिज्म है।
जिस सेक्यूलरिज्म को कांग्रेस ने भारतवासियों पर दशकों से थोपा, उसमें पक्षपात इतना साफ दिखता था कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को यह कहने में कोई तकलीफ नहीं हुई कि भारत के धन-साधन पर पहला अधिकार मुसलमानों का है। राजीव गांधी को कोई पक्षपात नहीं दिखा, जब उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के शाह बानो वाले फैसले को संसद में कानून पास करके रद्द कर दिया। उनके सुपुत्र राहुल को भी कोई तकलीफ नहीं हुई, जब उन्होंने अमेरिकी राजदूत को कहा कि ‘जेहादी आतंकवाद’ से ज्यादा खतरा भारत को ‘भगवा आतंकवाद’ से है। उनके सलाहकार दिग्विजय सिंह ने एक कदम आगे बढ़कर एक ऐसी किताब का समर्थन किया, जिसका शीर्षक था 26/11: आरएसएस की साजिश। जबकि हमले के फौरन बाद दुनिया जान गई थी कि उस आतंकवादी घटना के पीछे कौन थे।
पिछले सप्ताह दो अलग-अलग घटनाएं घटीं, जिन्होंने दर्शाया कि ऐसी झूठी सेक्यूलरिज्म के अब बुरे दिन आ गए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक की तलवार को मुस्लिम महिलाओं के सिर के ऊपर से हटा दिया। अगर कांग्रेस के ‘सेक्यूलर’ दौर में यह फैसला आया होता, तो इसका भी वही हश्र होता, जो जो शाह बनो मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के साथ हुआ। ऐसा करना संभव न होता, तो कांग्रेस नेताओं ने खुलकर विरोध किया होता। सो जिन मुस्लिम महिलाओं ने हिम्मत करके इस गलत प्रथा को समाप्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के दरवाजे खटकाए थे, उन्हें शुक्र मनाना चाहिए कि दिल्ली में इन दिनों हिंदुत्ववादियों का राज है।
लेफ्टिनेंट कर्नल श्रीकांत पुरोहित को भी शुक्र अदा करना चाहिए कि कांग्रेस का दौर समाप्त न हो गया होता, तो उन्हें शायद जमानत न मिलती। कांग्रेस के कई नेता कहते फिर रहे हैं कि कर्नल पुरोहित को जमानत देना गलत था। वे सेक्यूलरिज्म की दुहाई दे रहे हैं, लेकिन क्या समय नहीं आ गया है कि कांग्रेस के नेता सोचें कि कांग्रेस छाप सेक्यूलरिज्म ने देश का भला किया है या नुकसान। अगर वे सोचेंगे, तो उन्हें समझ में आ जाएगा कि क्यों 2014 में देश के मतदाताओं ने नरेंद्र मोदी को पूर्ण बहुमत से जिताया।
यह कैसा सेक्यूलरिज्म है, जो जेहादी आतंकवाद के दौर में भगवा आतंकवाद का भय फैला रहा है? यदि ऐसी कोई चीज है भी, तो क्या भगवा आतंकवादी दुनिया भर में हमले करने के काबिल हैं? हम सब जानते हैं कि हिंदू कट्टरपंथी या कथित भगवा आतंकवादी गोरक्षा के नाम पर थोड़ा-बहुत आतंक फैला सकते हैं, लेकिन इससे ज्यादा कुछ नहीं कर सकते। इसके बावजूद कांग्रेस के सेक्यूलर दौर में वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं ने इस झूठ को ऐसा बना दिया था कि पाकिस्तान वैश्विक मंचों पर कहने लगा था कि इस उपम-महाद्वीप में असली आतंकवाद भारत फैला रहा है, न कि पाकिस्तानी जेहादी संस्थाएं। सो यह भारत के हित में है कि इस किस्म की झूठी सेक्यूलरिज्म का जल्दी सर्वनाश हो जाए। ऐसा होने के बाद ही शायद कांग्रेस को पुनर्जीवन मिलेगा।