सुशासन को लेकर प्राचीनकाल से ही दुनिया के विद्वानों ने बहुत अच्छी बातें कही हैं। भारत के महान चिंतक विष्णुगुप्त चाणक्य ने कहा है कि राज्य का मूल उद्देश्य लोगों के योग क्षेम की रक्षा करना है। योग यानी जो प्राप्त नहीं है, उसे प्राप्त करने का प्रयास और क्षेम यानी जो प्राप्त हो चुका है, उसकी रक्षा करना। इसका सारांश एक शब्द है-जनकल्याण।
मध्य प्रदेश में बीते 11 वर्ष में मुख्यमंत्री के रूप में मुझे सुशासन के क्षेत्र में अनेक मौलिक काम करने में सफलता मिली। इनके परिणाम भी बहुत सुखद रहे। मैंने जो सबसे बड़ी चीज महसूस की वह यह थी, कि शासन और प्रशासन में बैठे लोगों की मानसिकता 'माई-बाप'वाली है। ये जीवाणु आज तक सक्रिय हैं। लोक कल्याणकारी राज्य की स्थापना के बावजूद शासन-प्रशासन के कर्णधारों की मानसिकता काफी हद तक उपनिवेशकालीन बनी हुई है। अंग्रेजों ने हमें अपना क्लोन बनाने के लिए हमारी युगों पुरानी और प्रभावी प्रशासकीय व्यवस्थाओं, सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों तथा आर्थिक तंत्र को लगातार तोड़ा। अपने कानून और अपनी व्यवस्थाएं खड़ी कीं। शिक्षा का अ-भारतीयकरण कर दिया।
राज्य और अखिल भारतीय प्रशासनिक पुलिस, वन, राजस्व तथा अन्य सेवाओं से निकलने वाले हमारे युवाओं में यह संस्कार गहराई से रोपित करने की आवश्यकता है कि वे अधिकारी के रूप में लोगों पर शासन करने नहीं, बल्कि लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा के अनुरूप उनकी सेवा करने जा रहे हैं। अधिकारियों और सरकार चलाने वाले अन्य लोगों को यह बात ध्यान में रखनी चाहिए कि देशकाल और परिस्थिति के अनुरूप नियमों और कानून के बाहरी स्वरूप में बदलाव भले आ जाए, पर उसकी मूल भावना जनकल्याण है और इसका हनन नहीं होना चाहिए। एक बात और ध्यान में रखनी चाहिए कि आम लोगों के विचारों और समझ की कभी अवहेलना न हो। मैंने महसूस किया कि समाज के विभिन्न वर्गों की योजनाएं बनाने और वर्तमान योजनाओं में परिवर्तन करने के लिए जब मैंने विभिन्न वर्गों की पंचायतें बुलाईं, तब उनमें शामिल बहुत साधारण से दिखने वाले और बहुत मामूली पृष्ठभूमि के लोगों ने जो सुझाव और विचार सामने रखे, वे शायद आईआईएम से पढ़े हुए लोगों के मन में भी नहीं आते होंगे। उनमें धरातल की व्यावहारिक समझ थी।
मध्य प्रदेश में हमने लोगों को समय सीमा के भीतर लोक सेवाओं की गारंटी देने के लिए लोक सेवा प्रदाय गारंटी कानून लागू किया। इसमें लोगों से सीधे जुड़े 23 विभागों की 164 सेवाओं को शामिल किया गया है। इसमें समय सीमा के भीतर सेवा न देने वाले लोकसेवक पर जुर्माना लगाया जाता है। यह प्रयोग इतना अच्छा रहा कि इसे संयुक्त राष्ट्र ने लोकसेवा प्रदाय श्रेणी के अंतर्गत पुरस्कृत किया। अनेक प्रदेशों ने भी इसे लागू किया है। सुशासन को आगे बढ़ाने के लिए हमने अलग से लोकसेवा प्रबंधन विभाग का गठन किया है। लोगों को सरकारी दफ्तरों में काम करवाने में आने वाली दिक्कतों को दूर किया। दस्तावेज नोटराइज कराने और विद्यार्थियों को अपने दस्तावेज राजपत्रित अधिकारी से सत्यापित कराने की व्यवस्था खत्म की। उन्हें स्व-प्रमाणीकरण की सुविधा दी गई।
सूचना, संचार प्रौद्योगिकी का हमने बहुत अच्छा उपयोग किया है, जिससे सुशासन को बढ़ावा मिला है। इससे जहां लोगों को सुविधाएं आसानी से मिल रही हैं, वहीं प्रशासन में सभी स्तरों पर कार्यकुशलता बढ़ी है। सीएम हेल्पलाइन, समाधान ऑनलाइन, परख जैसे प्रयोग बहुत सफल रहे हैं। हम प्रदेश की सभी 23 हजार से ज्यादा ग्राम पंचायतों को नेशनल ऑप्टिक फाइबर नेटवर्क के जरिए ब्राडबैंड कनेक्टिविटी उपलब्ध करवा रहे हैं। विकासखंड स्तर तक वीडियो कान्फ्रेंसिंग सुविधा के लिए अधोसंरचना विकसित की गई है। प्रदेश में ई-टेंडरिंग, ई-मेजरमेंट और ई-रिसीप्ट की व्यवस्था की गई है। खसरों की इलेक्ट्रानिकली हस्ताक्षरित प्रतियां उपलब्ध करवाने के लिए योजना इसी वर्ष से लागू की गई है। इलेक्ट्रॉनिक एग्रीगेशन ऐंड एनेलाइजर लेयर (ई-टॉल) पोर्टल में इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शन के मामले में मध्य प्रदेश को गुजरात के बाद देश में दूसरे नंबर पर रखा गया है। लगभग पांच लाख शासकीय कर्मचारियों का डाटाबेस संधारित किया जा रहा है। किसानों को अनुदान तथा उपार्जन की राशि, विद्यार्थियों को छात्रवृत्तियां और अनेक योजनाओं के हितग्राहियों को मिलने वाले लाभ सीधे उनके बैंक खातों में जमा हो रहे है। इसके लिए सभी परिवारों का पंजीयन कर समग्र पोर्टल तैयार किया गया है। देश में पहली और दुनिया की सबसे बड़ी डायल-100, पुलिस सहायता प्रणाली प्रदेश में लागू की गई है। एम.पी. मोबाइल द्वारा 150 से अधिक नागरिक सेवाएं दी जा रही हैं। ई-संपदा के अंतर्गत एक क्लिक पर संपत्ति का पंजीयन हो जाता है। डिजिटल जाति प्रमाण-पत्र जारी करने की व्यवस्था लागू की गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कालेधन को समाप्त करने के लिए नोटबंदी की जो व्यवस्था लागू की है, उसे पूरी ताकत के साथ लागू करने की दिशा में हमने ठोस प्रयास किए हैं। ग्राम पंचायत स्तर तक हम सारे भुगतान डिजिटल माध्यम से करने की व्यवस्था बनाने जा रहे हैं। कैशलेस ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उपाय किए जा रहे हैं। इसके लिए व्यापक प्रशिक्षण का काम शुरू किया गया है। पॉइंट आफ सेल मशीन की खरीदी पर वैट को माफ किया जा रहा है। अंत में एक बात और कहना चाहूंगा कि अधिकारियों का आचरण बहुत कुछ राजनेताओं के आचरण से प्रभावित होता है। सरकार में बैठे लोगों को अपने आचरण से प्रशासकों और अन्य अधिकारियों के समक्ष प्रत्यक्ष उदाहरण रखना होगा। तभी हम देश में सही अर्थों में सुशासन सुनिश्चित कर पाएंगे।