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चोगा ही मेरी संपत्ति है

शिवकुमार गोयल Updated Wed, 27 Feb 2013 09:56 PM IST
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कोई भी व्यक्ति कितना ही रसूखदार और भौतिक सुख-सुविधा से संपन्न क्यों न हो, अगर वह अधर्म के मार्ग पर चल रहा हो, तो उसका भी खुलकर विरोध करना चाहिए और उसे धर्म के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करना चाहिए। रोमन सम्राट बेलेंस की मनमानी का संत बाजिल डटकर विरोध करते थे। वह कहा करते थे कि क्रूर व अत्याचारी शासक प्रजा का मन कभी नहीं जीत सकता।
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सम्राट बेलेंस ने नाराज होकर संत बाजिल को आतंकित करने के लिए सैन्य टुकड़ी भेजी। टुकड़ी के अधिकारी को आदेश दिया गया कि यदि संत यह आश्वासन नहीं दे कि वह विरोध नहीं करेंगे, तो उनकी तमाम संपत्ति जब्त कर उन्हें राज्य से निष्कासित कर दिया जाए।

सैन्य अधिकारी संत बाजिल के आश्रम में पहुंचा। उसने संत को संपत्ति जब्त करने तथा निष्कासित की धमकी दी। संत धमकी सुनकर मुस्कराए तथा बोले, मेरे पास संपत्ति के नाम पर एक चोगा, लोटा तथा पुस्तकें हैं। इन्हें आप जब्त कर सकते हैं। जहां तक निष्कासित करने का प्रश्न है, तो जो व्यक्ति परिवार त्यागकर फकीर बन गया है, उसे राज्य छोड़ते क्या देर लगेगी।
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संत ने समझाते हुए कहा, एक संन्यासी होने के नाते मेरा धर्म है कि मैं राजा को गलत कामों से बचने की चेतावनी दूं। मैं इस फर्ज को धमकियों से डरकर कैसे छोड़ सकता हूं। सैन्य अधिकारी संत की निर्भीकता देखकर हतप्रभ रह गया।
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