एप डाउनलोड करें
विज्ञापन

किस दिशा में जा रहा है पाकिस्तान

कुलदीप तलवार Updated Mon, 01 Sep 2014 08:24 PM IST
विज्ञापन
विज्ञापन

Next Article

पाकिस्तान में इमरान खान और ताहिर उल कादरी द्वारा नवाज शरीफ का इस्तीफा मांगने के मुद्दे पर शुरू हुआ आंदोलन इस भयानक मोड़ पर पहुंच चुका है कि चुनी हुई सरकार के अस्तित्व पर खतरा महसूस होने लगा है। ऐसा लगता है कि ये दोनों पाकिस्तान के हालात ऐसा करने की कोशिश में लगे हैं कि फौज को दखल देने का अवसर मिल जाए और उन्हें इसकी कुछ कीमत मिल जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले ढाई सप्ताह से भी अधिक समय से इस्लामाबाद में संसद के सामने चौक पर दो धरने जारी हैं। एक क्रिकेट से राजनीति में आए इमरान खान का, जो नए पाकिस्तान की स्थापना, मई, 2013 में हुए आम चुनाव में कराई गई धांधली के खिलाफ, व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे के लिए जारी है। दूसरा अवामी तहरीक पार्टी के मुखिया मौलाना ताहिर उल कादरी का, जो देश में क्रांति लाना चाहते हैं और लाहौर में 14 जून को उनकी पार्टी के 14 समर्थकों की सुरक्षा बलों और पुलिस के साथ हुई हिंसक झड़पों में हुई हत्याओं को लेकर नवाज शरीफ, उनके भाई पंजाब के मुख्यमंत्री शहबाज शरीफ व अन्य 19 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की मांग कर रहे थे। इन सबके खिलाफ मुकदमा दर्ज हो चुका है। इमरान और मौलाना, दोनों सेना प्रमुख से मिल चुके हैं। नवाज शरीफ को हटाने में ये सेना की मदद चाहते हैं, और यही खतरनाक बात है।

यह सही है कि इस मामले में सरकार की ओर भी गलतियां हुई हैं। उसने चुनाव में धांधली के आरोपों की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की पेशकश उस समय की, जब लांग मार्च शुरू होने में बहुत कम समय रह गया था। अगर सरकार इमरान खान के साथ बातचीत बहुत पहले करती, तो नौबत धरने तक नहीं पहुंचती। पर कादरी और इमरान खान की गल्तियां मुल्क पर भारी पड़ सकती हैं। अभी प्रदर्शनकारी चाहे जितने भी उग्र हों और इसके पीछे चाहे जो भी वजह हो, पर पाकिस्तान का बड़ा तबका मुल्क को अस्थिर करने के इनके इरादों के साथ नहीं है। इमरान खान ने शुरुआत में अपने भाषण में कहा था कि यह आंदोलन टैक्स और सरकार के बिलों का भुगतान न करने के लिए किया जा रहा है। उनका यह भी कहना था कि प्रधानमंत्री अगर इस्तीफा नहीं देते, तो आंदोलनकारी उन्हें जबरन उठा सकते हैं। इससे जनता में संदेश अच्छा नहीं गया। इसलिए लोगों ने टैक्स और बिजली-पानी के बिलों की अदायगी रोकी नहीं।
विज्ञापन


कई पाकिस्तानी मानते हैं कि नवाज शरीफ से इस्तीफा मांगने का इमरान खान को अधिकार नहीं। प्रधानमंत्री को बर्खास्त कराने के लिए उनके पास सांसदों की पर्याप्त संख्या होनी चाहिए। प्रधानमंत्री हाउस पर कब्जा करने से भी कोई प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। आखिर एक साल बाद उन्हें चुनाव में धांधली की याद कैसे आई?

इमरान और कादरी का यह आंदोलन सिर्फ पंजाब तक सिमटा हुआ है, इसलिए इसे राष्ट्रीय लहर भी नहीं कह सकते। इन दोनों ने बलूचिस्तान और सिंध के संगीन हालात का जिक्र अपने भाषणों में नहीं किया। वे यह भी भूलते हैं कि बलूचिस्तान विधानसभा ने इन धरनों के विरोध में प्रस्ताव पारित किया है और नेशनल एसेंबली में नौ विपक्षी पार्टियां सरकार के साथ हैं। इसके बावजूद पाकिस्तान के मौजूदा हालत से चिंता होती है, तो इसलिए कि लोकतांत्रिक सरकार को बर्खास्त करने का वहां पुराना रिवाज है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
एप में पढ़ें