एक समय वह था जब भारतीय बल्लेबाजी क्रम में राहुल द्रविड, सौरव गांगुली, वीवीएस लक्ष्मण जैसों की जगह होती थी।
सचिन तेंदुलकर और वीरेंद्र सहवाग के साथ इन सभी को महेंद्र सिंह धोनी को कभी कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी। लेकिन अब धोनी की भूमिका बदल गई है।
अब उन्हें युवा बल्लेबाजों की मौजूदगी में बड़े की भूमिका निभानी पड़ रही है। खुद धोनी ने यह स्वीकार किया है कि अब वरिष्ठ खिलाड़ी होने के नाते टीम में उनकी थोड़ी भूमिका बदली है।
धोनी ने इन वरिष्ठ खिलाड़ियों के बीच खुद को कभी बड़ा नहीं समझा। लेकिन सचिन और सहवाग के साथ वह इस वक्त टीम के वरिष्ठ साथियों में हैं।
वक्त बदला है तो धोनी ने अपनी भूमिका को भी बदल लिया है। धोनी ने माना पहले के मुकाबले अब टीम की बल्लेबाजी लाइन अप लगभग पूरी तरह बदल चुकी है।
पहले उन्हें किसी को कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ती थी। सभी सीनियर थे और अपनी गलतियां खुद समझते थे। लेकिन अब टीम में युवा खिलाड़ी आ चुके हैं।
उन्हें उनका अच्छा बुरा बताना उनका फर्ज बनता है। मैदान के बाहर बताई गई इन चीजों से मैदान के अंदर चीजें सही ढंग से घटती हैं। अगर इन खिलाड़ियों को अभी से यह नहीं बताया जाएगा तो वह इन्हीं आदतों को लेकर आगे जाएंगे।
हो सकता है कि वह दो, तीन या चार साल तक टीम में हों लेकिन इन युवाओं को आगे आठ-10 सालों तक खेलना है। उन्हें अभी से अच्छी आदतें और उनकी खामियां नहीं बताई गईं तो यही काम वह अपने जूनियर खिलाड़ियों के साथ करेंगे। इस लिए वह इस थोड़ी सी बदली हुई जिम्मेदारी को निभा रहे हैं।