देहरादून। चारों तरफ शहनाई की गूंज है। शादी का सीजन चोटी पर है, लिहाजा सात फेरे दिलाने वाले पंडितों की भी पूछ जबरदस्त है। लेकिन इससे यह अंदाजा मत लगा बैठिएगा कि पंडित जी की यह डिमांड बस इसी सीजन में है। पंडित जी बेचारे और गुरबत के मारे कतई नहीं रह गए हैं। यह बढ़िया प्रोफेशन का रूप ले चुका है। यही वजह है कि तीन साल के भीतर अकेले दून में पंडितों की संख्या दुगुनी हो गई है। पांच हजार से बढ़कर लगभग आठ हजार से ऊपर पहुंच चुकी है। अकेले उत्तराखंड विद्वत सभा से 1600 सदस्य जुड़े हैं। ग्रह शांति के लिए पूजन, मुंडन संस्कार, यज्ञोपवीत संस्कार, जन्म कुंडली बांचने, ज्योतिष सलाह देने जैसे कार्य इनके लिए खासे ‘स्कोप’ वाले बने हुए हैं।
डाक्टरेटधारी पांच दर्जन से ज्यादा
ऐसा नहीं कि पुरोहिताई, पंडिताई के काम में केवल पुश्त ही अहम हो। जो नए लोग इस काम में एंट्री ले रहे हैं, उनमें ज्यादातर शिक्षा, आचार्य की डिग्री हासिल हैं। इस वक्त डाक्टरेटधारी ही पांच दर्जन से ज्यादा हैं।
यजमानों से जुड़े आन लाइन
दून के कई पंडित ऐसे हैं, जो अपने यजमानों से आन लाइन जुड़े हुए हैं। यजमान कई बार यह चैंटिंग के जरिए अपनी छोटी-मोटी दिक्कतें पंडितों से शेयर करते हैं। पंडित भी इनका आन लाइन समाधान सुझाते हैं।
कई वजह यह ट्रेंड बढ़ने की
शिक्षा, सेना की ओर जाने के बजाए पंडित विभिन्न कर्मकांड, संस्कार में रुचि ले रहे हैं। अकेले दून में इसमें बढ़ोत्तरी की वजह जनसंख्या में बढ़ोत्तरी के साथ ही व्यक्ति के जीवन में बढ़ने वाला तनाव है।
-पं. उदय शंकर भट्ट, अध्यक्ष-उत्तराखंड विद्वत सभा