आपदा के मंजर भले ही इस बात की गवाही दे रहे हों कि पुनर्निर्माण और पुनर्वास में वर्षों लगेंगे, लेकिन सरकार मान कर चल रही है कि आपदा से पैदा हुए हालात अगले तीन महीने में ठीक हो जाएंगे।
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सुप्रीमकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से दिए गए हलफनामे का मजमून कम से कम यही बता रहा है। वहीं केंद्रीय कैबिनेट सेक्रेटरी ने आपदा में अब तक हुए राहत और बचाव के कार्यों का ब्योरा तलब किया है।
सुप्रीमकोर्ट ने मांगा था शपथ पत्र
राज्य में आई आपदा पर केंद्र सरकार के साथ ही साथ सुप्रीमकोर्ट भी निगरानी कर रही है। सुप्रीमकोर्ट ने राज्य सरकार से आपदा के राहत और बचाव कार्यों पर शपथ पत्र मांगा था। दो दिन पहले दिए शपथ पत्र में राज्य सरकार ने न तो रेस्क्यू किए गए यात्रियों का स्पष्ट आंकड़ा दिया और न ही स्थानीय लोगों का।
कितने लापता हैं, इस बारे में भी साफ-साफ न कह कर गोलमोल बात कही है। वहीं आपदा प्रभावित स्थानीय लोगों को राहत सामग्री पहुंचाने और राशन के मामले में पिछले दिनों कैबिनेट में लिए गए फैसले से अलग बात कही है।
एक महीने का मुफ्त राशन
हलफनामे में सरकार की ओर से बताया गया कि आपदा प्रभावित गांवों में एक महीने का मुफ्त राशन दिया जा रहा है। साथ ही संपर्क मार्गों से कट चुके गांवों के ग्रामीणों को अगले तीन महीने अथवा जब तक संपर्क मार्ग नहीं बन जाता, मुफ्त राशन दिया जाएगा। जबकि शासनादेश में केवल एक माह ही मुफ्त राशन देने का जिक्र है।
इस बारे में सचिव आपदा प्रबंधन भास्करानंद का कहना है कि शासनादेश पहले जारी हुआ था। अब सरकार जनहित में तीन महीने मुफ्त राशन देने का फैसला कर चुकी है तो शासनादेश कभी भी संशोधित हो सकता है। इसमें गड़बड़ी कहां है।
बहरहाल सुप्रीमकोर्ट में हलफनामा देकर अब सरकार तीन महीने मुफ्त राशन देने को बाध्य हो गई है। ऐसा नहीं करने पर कोर्ट की अवमानना होगी, जो सरकार के लिए भारी पड़ सकता है।
वहीं आपदा के संबंध में अब कैबिनेट सेक्रेटरी ने भी स्टेटस रिपोर्ट तलब कर ली है। आपदा प्रबंधन सचिव भास्करानंद शुक्रवार शाम ही दिल्ली के लिए रवाना हो गए। बताया गया कि शनिवार को उन्हें केंद्रीय कैबिनेट सेक्रेटरी को ब्रीफिंग देनी है।
कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में नहीं जाएंगे बहुगुणा
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी की ओर से बुलाए गए कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों के सम्मेलन में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा शामिल नहीं होंगे। इस बारे में बहुगुणा ने बताया कि आपदा राहत कार्यों में व्यस्तता के चलते उन्होंने सम्मेलन में न पहुंच पाने की अनुमति सोनिया गांधी से ले ली है। अपने एवज में किसी कैबिनेट मंत्री को सम्मेलन में शिरकत करने के लिए भेज रहे हैं।
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