तीर्थनगरी ने जीता मैक्सिको की पावला का दिल
-- उत्तराखंड की संस्कृति में रमी विदेशी युवती ने निर्धन बच्चों के लिए स्कूल खोलने की बनाई योजना
नवीन नौटियाल
ऋषिकेश।
मैक्सिको से तीर्थनगरी घूमने आई 25 वर्षीय युवती पावला उत्तराखंड की संस्कृति में ऐसी रम गई हैं कि अब उन्होंने बच्चों को शिक्षित करने का बीड़ा उठाया है। भविष्य बनाने के लिए भारत आई पावला का तीर्थनगरी पहुंचने के बाद जीवन का उद्देश्य ही बदल गया है। पावला ने तीर्थनगरी में एक स्कूल खोलने की योजना बनाई है, जहां पर गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा देंगी। उत्तराखंड की आबो हवा में रमी पावला ने कहा कि भारत अनेकता में एकता और मन में मानव सेवा का भाव जगाने वाला अतुल्य देेश है।
यहां आकर कठोर से कठोर हृदय वाले व्यक्ति के भीतर भी निर्धन, गरीब व जरूरतमंद लोगों की सेवा का भाव खुद आ जाता है। मैक्सिको की इंटरनेशनल रिलेशंस की छात्रा पावला यहां संस्कृति, रीति-रिवाज, भाषाओं, रहन-सहन व खान-पान पर रिसर्च भी कर रही है। वह भारत को विश्व गुरू बताती हैं। पावला अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय से परास्नात्तक कर चुकी हैं। बीते महीने 20 जुलाई को भारत आईं पावला का कहना है कि यहां आने से पहले उनका मकसद यहां से अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए हिंदुस्तान की संस्कृति, सभ्यताओं से रूबरू होना था। मगर तीर्थनगरी आने के बाद जीवन का उद्देश्य ही बदल गया।
सेवा भाव क्या होता है यहां आकर जाना
पावला ने कहा कि ऋषिकेश में समाजसेवी व चिकित्सक डा. राजे नेगी द्वारा गरीब व निर्धन बच्चों के लिए संचालित किए जा रहे निशुल्क उड़ान स्कूल के बारे में बताया, जिसके जरिए उन्हें मानवता की सेवा का भाव करीब से जानने का मौका मिला। कहा कि स्वदेश लौटकर नौकरी के माध्यम से धन अर्जित करेंगी और इसके बाद गरीब व निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा देने के लिए स्कूल खोलेंगी। उन्होंने बताया कि यहां आने से पहले वह नौकरी कर कमाए गए धन से अपने पिता हूवान, माता ईवोन व बहनें जेनिफर, जेकेलिन को सारी सुविधाएं देना चाहती थीं, मगर अब वह गरीब व निर्धन बच्चों को निशुल्क शिक्षा देकर सेवा का कार्य करेंगी।