अमर उजाला ब्यूरो
हरिद्वार।
स्टूडेंट्स ओलंपिक एसोसिएशन इंडिया की ओर से चौथे स्टूडेंट ओलंपिक नेशनल गेम्स खेलों का आगाज विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने किया। उन्होंने कहा कि यहां से खेलकर निकले खिलाड़ी देश के साथ विदेशों में विभिन्न प्रतिस्पर्धाओं में अपना और देश का नाम रोशन करेंगे।
शनिवार को प्रेमनगर आश्रम में स्टूडेंट्स ओलंपिक के शुुभारंभ अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि बच्चों और युवाओं में खेलों के प्रति उत्साह बढ़ा है। कहा कि हरिद्वार की धरती पर खेलकर बच्चे देश- दुनिया में अच्छा संदेश देंगे। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विधायक स्वामी यतीश्वरानंद ने कहा कि देश के खिलाड़ियों ने दुनिया में नाम रोशन किया और करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजनों से युवाओं को पूरे देश की संस्कृति समझने का मौका मिलता है। संचालन करते हुए संगठन के राष्ट्रीय सचिव डा. प्रदीप भारद्वाज ने खेलकूदों की रूपरेखा बताई। इस मौके पर विधायक देशराज कर्णवाल, एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. भगवंत सिंह वनार, मलेशिया से चंद्रमुरगैया, प्रदेश सचिव रमेश शास्त्री, डा. कुलवंत वाचस्पति, डा. अजय मलिक, नरेंद्र सिंह, आश्करम उपप्रबंधक पवन कुमार आदि शामिल हुए। प्रतियोगिता के तहत रेसलिंग, कुश्ती, जुड़ो, योग, कराटे, कुंगफू, ताइक्वांडो, वुशू, जूडो, चैस, कैरम, योगा आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन नौ अक्तूबर तक चलेगा।
दलित के साथ काला होने पर नहीं बुलाया: देशराज
हरिद्वार। चौथे स्टूडेंट ओलंपिक नेशनल गेम्स खेलों के शुभारंभ में बतौर मुख्य अतिथि विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के सम्मान में पहुंचे झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल नाराज हो गए। उन्होंने स्वयं को दलित विधायक होने और रंग काला होने से कार्यक्रम में उपेक्षित करने का आरोप लगाया।
कार्यक्रम शुभारंभ करने के उपरांत विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, विधायक स्वामी यतीश्वरानंद प्रेमनगर आश्रम के वीआईपी गेस्ट हाउस में बैठे थे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज आश्रम में पहुंच गए और गेस्ट हाउस के दूसरे कक्ष में बैठ गए। वहां पर उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष और विधायक स्वामी को अपने कक्ष में बुलवा लिया। इस दौरान विधायक देशराज कर्णवाल अकेले ही कक्ष में बैठे रह गए। करीब दस मिनट बीतने के बाद जब उन्हें नहीं बुलाया तो वे नाराज हो गए। उन्होंने वहां पर मौजूद लोगों के बीच में स्वयं को दलित और रंग काला होने की बात कहते हुए उपेक्षित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह उनका नहीं, बल्कि दलित समाज का अपमान है। उनकी नाराजगी विस अध्यक्ष और सतपाल महाराज तक पहुंची तो आश्रम के वरिष्ठ पदाधिकारियों को उन्हें मनाने भेजकर अपने कक्ष में बुलवाया। मामले को लेकर चर्चा चलती रही।