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आंचलिक फिल्मों को टैक्स फ्री करने की मांग

Updated Wed, 06 Dec 2017 01:41 AM IST
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आंचलिक बोली भाषा की फिल्में हों करमुक्त
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-- विस अध्यक्ष के माध्यम से सीएम को ज्ञापन किया प्रेषित

अमर उजाला ब्यूरो
ऋषिकेश।
उत्तराखंड में आंचलिक फिल्मों को प्रोत्साहन देने और टैक्स फ्री करने की मांग को लेकर मैती स्वयंसेवी संस्था ने विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया है। उन्होंने राज्य में आंचलिक बोली भाषा की फिल्मों को मनोरंजन व अन्य प्रकार के टैक्स से मुक्त करने के साथ ही फिल्म निर्माता को फिल्मों के निर्माण में भी आर्थिक सहयोग देने की पुरजोर मांग उठाई है। संस्था की अध्यक्ष कुसुम जोशी ने कहा कि प्रदेश में गढ़वाली और कुमाउंनी फिल्मों को सिनेमा हॉल में प्रदर्शन के एवज में थिएटर संचालकों द्वारा एडवांस किराए की मांग की जाती है।
इससे निर्माताओं को फिल्म के प्रदर्शन में दुश्वारियां पेश आ रही हैं। इस दौरान उनका कहना था कि प्रदेश में थियेटर संचालक आंचलिक फिल्मों के प्रदर्शन में आनाकानी से उत्तराखंड की बोली भाषा की फिल्मों के निर्माण पर भी इसका असर पड़ेगा, जिससे निर्माता फिल्मों के निर्माण से कतराएंगे। संस्था ने राज्य सरकार से प्रदेश के सिनेमाघरों में आंचलिक फिल्मों के प्रदर्शन को अनिवार्य करने और उन्हें मनोरंजन कर में रियायत देने की मांग की है। इस मौके पर रामरतन रतूड़ी, सुग्रीव द्विवेदी, रूपचंद जखमोला, अंकित नैथानी, गायक कमल जोशी, संजीव चौहान आदि मौजूद थे।
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वहीं, दूसरी ओर ड्रीम्स अनलिमिटेड फिल्म प्रोडक्शन हाउस के निदेशक और गढ़वाली फिल्म बौड़िगी गंगा के निर्माता अनिरुद्ध गुप्ता ने भी विधानसभा अध्यक्ष अग्रवाल को ज्ञापन सौंपा। उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से प्रदेश के सिनेमा हॉलों में आंचलिक फिल्मों के प्रदर्शन को अनिवार्य किए जाने के बाबत शासनादेश जारी करने की मांग उठाई है। उनका कहना था कि प्रादेशिक बोली भाषा की फिल्मों को प्रोत्साहन देने के लिए सिनेमा हॉल में हिंदी फिल्मों के समान ही 50 प्रतिशत टैक्स का प्रावधान किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार से आंचलिक फिल्मों के प्रोत्साहन के लिए उचित कदम उठाने की मांग की है।
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