देवाल। बुग्यालों के संरक्षण के मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर वन विभाग ने अमल लाना शुरू कर दिया है। लोहाजंग के पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के पर्यटकों को रात्रि में बुग्यालों में ठहराने संबंधी प्रार्थना पत्र को विभाग ने लौटा दिया है। व्यवसायियों का कहना है कि एक सितंबर से दो माह के लिए देश, विदेश के तीन हजार पर्यटकों की यहां ट्रैकिंग के लिए एडवांस बुकिंग कराई है। बुकिंग रद्द हो गई तो आर्थिक नुकसान होगा। वहीं बुग्याल संरक्षण समिति बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक हटाने के लिए दोबारा याचिका हाईकोर्ट में डालने पर विचार कर रही है।
सितंबर शुरू होते ही ब्लाक के आली, वेदनी, बगची, रूपकुंड आदि बुग्यालों को जाने के लिए पर्यटकों की आमद शुरू हो जाती है। इनका बेस कैंप लोहाजंग में होता है, लेकिन हाईकोर्ट की ओर से बुग्यालों के संरक्षण के लिए रात्रि प्रवास पर रोक के बाद पर्यटक अब बुग्यालों में नहीं जा सकेंगे। बंगलूरू की ट्रैकिंग कंपनी इंडिया हैक्स से जुड़े धन सिंह, दिल्ली की यूथ हास्टल के भुवन सिंह, ऋषिकेश ट्रैक द हिमालया के संदीप जोशी ने वन विभाग से रूपकुंड जाने के लिए अनुमति मांगी, लेकिन वन विभाग ने इसे खारिज कर दिया। ट्रैकिंग कंपनी से जुड़े लोगों का कहना है कि पर्यटकों ने लोहाजंग बेस कैंप में होटलों की एडवांस बुकिंग कर दी है। यदि अनुमति नहीं मिलती तो लोहाजंग में पर्यटन व्यवसाय चौपट हो जाएगा। सैकड़ों लोग बेरोजगार हो जाएंगे। बदरीनाथ वन प्रभाग डीएफओ एनएन पांडे ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया जा रहा है। बुग्यालों में रात्रि विश्राम के लिए किसी भी टूरिस्ट को परमीशन नहीं दी जा सकती।
दोबारा याचिका डालने पर हो रहा विचार
देवाल। आली-वेदनी-बगजी बुग्याल संरक्षण समिति की ओर से कोर्ट में बुग्यालों के संरक्षण के लिए याचिका दायर की गई थी। समिति के सचिव भुवन बिष्ट ने बताया कि समिति के अध्यक्ष की मृत्यु हो जाने के कारण समिति कोर्ट के फैसले का अध्ययन नहीं कर पाई है। वकील से संपर्क किया जा रहा है। इस बारे में शीघ्र बैठक कर कोर्ट में बुग्यालों में रात्रि विश्राम पर रोक हटाने के लिए पुन: याचिका दायर करने पर विचार किया जा रहा है।