ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
छात्रों की समस्याओं को देखते हुए प्रदेश के कॉलेजों में परास्नातक (पीजी) और स्नातक (यूजी) की सीटें बढ़ेंगी। सोमवार को उच्च शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने विभाग की समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कुमाऊं मंडल के कॉलेजों में विशेष तौर पर स्नातक और परास्नातक की कम सीटों के चलते समस्या आ रही थी। दूसरी ओर, कॉलेजों में स्थायी नियुक्ति होने तक संविदा पर शिक्षकों को रखा जाएगा।
डॉ. धन सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई बैठक में डिग्री कॉलेजों की समस्याओं पर चर्चा हुई। मंत्री ने कहा कि सरकार का मकसद ‘सबको शिक्षा, अच्छी शिक्षा’ देना है। किसी को उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहने दिया जाएगा। इसलिए तय किया गया है कि जिन कॉलेजों में परास्नातक की सीटें कम हैं, वहां सीटों में पांच से दस प्रतिशत बढ़ोतरी की जाएगी। जिन कॉलेजों में स्नातक की सीटों की कमी है, वहां सीटों में 30 से 40 प्रतिशत बढ़ोतरी की जाएगी। विशेषकर कुमाऊं मंडल के डिग्री कॉलेजों में सीट बढ़ोतरी की जाएगी। इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए। साथ ही यह भी कहा गया कि जिन कॉलेजों में इन्फ्रास्ट्रक्चर के हिसाब से छात्रों की संख्या ज्यादा होगी, वहां सांध्यकालीन कक्षाएं भी संचालित की जाएं।
जहां शिक्षकों के पद रिक्त हैं, वहां असिस्टेंट प्रोफेसर की स्थायी नियुक्ति होने तक संविदा या फिर अंशकालिक शिक्षक पढ़ाएंगे। मंत्री ने सभी कॉलेजों के प्राचार्यों को विषयवार शिक्षकों के रिक्त पदों को भरने का प्रस्ताव देने के निर्देश दिए हैं। जिन कॉलेजों में ऑनलाइन प्रक्रिया से दाखिले के बाद भी सीटें रिक्त रह गईं, वहां ऑफलाइन प्रवेश की व्यवस्था की जाएगी। डॉ. रावत ने कहा कि 95 प्रतिशत दाखिले ऑनलाइन प्रक्रिया से हो चुके हैं। छात्रहितों का ध्यान रखते हुए ये फैसले लिए गए हैं। बैठक में उच्च शिक्षा सचिव अशोक कुमार, संयुक्त निदेशक डॉ. जेसी घिल्डियाल, श्रीदेव सुमन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. उदय सिंह रावत, कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डीके नौरियाल, संजय पंत, उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय के डॉ. पीडी पंत और विभिन्न कॉलेजों के प्राचार्य मौजूद रहे।