अनदेखी को लेकर क्षत्रपों में सुलग रही चिंगारी भड़क उठी। जार्ज फर्नांडिस के साथ रक्षा राज्यमंत्री रहे बची सिंह रावत का इस्तीफा इसकी बानगी भर है।
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मौजूदा व सीएम हरीश रावत की कुमाऊं की राजनीति से बेदखली का श्रेय भी बचदा को ही जाता है। यह भी सच है कि भाजपा ने यदि डैमेज कंट्रोल नहीं किया तो दूसरे संसदीय क्षेत्रों में भी दिग्गजों की पीड़ा बाहर आ सकती है।
अटल सरकार में मंत्री रहे बचदा
इसे समय का फेर ही कहिए वर्ना बची सिंह रावत जितना भारी भरकम पॉलिटिकल प्रोफाईल प्रदेश में शायद ही किसी नेता के पास हो। 1991 में रानीखेत से विधायक बने और कल्याण सिंह सरकार में राजस्व राज्यमंत्री की शपथ ली। फिर 1993 में भी विधायक चुने गए।
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इसके बाद 1996 से 2004 तक लगातार अल्मोड़ा संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव जीतकर मौजूदा मुख्यमंत्री हरीश रावत जैसे दिग्गज को कुमाऊं से तड़ीपार कर दिया।
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अटल बिहारी की पहली सरकार में बचदा जार्ज फर्नांडिस के लेफ्टिनेंट के रूप में केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री बने। इसके बाद वह मुरली मनोहर जोशी के साथ सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री भी रहे।
कोश्यारी से था मुकाबला
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रहे बची सिंह रावत पिछले दिनों से आहत थे। जब लोकसभा चुनाव की बात हुई तो अपरोक्ष रूप से उनका सामना भगत सिंह कोश्यारी से हुआ।
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उनके आरोप में कितना दम है, यह तो समय बताएगा लेकिन इस वक्त पूरी पार्टी हलकान है। लेकिन उनका यह कहना कि राज्य संसदीय बोर्ड के नाम केंद्रीय हाईकमान तक नहीं पहुंचाए गए, प्रदेश संगठन को कटघरे में खड़ा कर रहा है।