सैंती गांव के गढ़वाल राइफल्स के जवान रोहित मैंदोली का मंगलवार को पैतृक घाट नंदाकिनी और चुफलागाड़ के संगम पर राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार हुआ। इस दौरान घाट बाजार भी दोपहर तक बंद रहा।
सैनिक की अंतिम यात्रा में गढ़वाल राइफल्स व गढ़वाल स्काउट के अधिकारी-जवान, पूर्व सैनिक, व्यापारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। बीकानेर, राजस्थान में अचानक तबियत बिगड़ने से रोहित की दो फरवरी को मौत हो गई थी। सोमवार को देर शाम सैनिक का पार्थिव शरीर घाट तहसील मुख्यालय पहुंचा। मंगलवार को सुबह साढ़े दस बजे ताबुत में बंद सैनिक के शरीर को सैंती गांव ले जाया गया।
जैसे ही जवान का शव गांव में पहुंचा तो परिजन ताबुत पर लिपट गए। जवान का शव तिरंगे से लिपटा हुआ था। पूर्वाह्न साढ़े ग्यारह बजे शव को पैतृक घाट नंदाकिनी और चुफलागाड नदी के संगम स्थल पर लाया गया। यहां कर्नल भरत सिंह, मेजर अनूप कुमार, लेप्टिनेंट आदित्य, सूबेदार प्रेम सिंह, करन सिंह, दिलबर सिंह, श्याम सिंह, इंद्रमणि जोशी, ज्ञान सिंह, थराली विधायक मुन्नी देवी, ब्लॉक प्रमुख कर्ण सिंह, जिला पंचायत सदस्य गुड्डू लाल ने जवान के शव पर पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्घांजलि दी। इसके बाद मृतक जवान के भाई राजेंद्र प्रसाद ने शव को मुखाग्नि दी। इस मौके पर तहसीलदार सोहन सिंह रांगड़, सुखवीर रौतेला, लक्ष्मण सिंह राणा, देव सिंह, अर्जुन सिंह आदि मौजूद थे।
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2017 में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुआ था जवान
सैंती गांव के मथुरा प्रसाद मैंदोली का 22 वर्षीय पुत्र रोहित वर्ष 2017 में गढ़वाल राइफल्स में भर्ती हुआ था। इन दिनों उसकी तैनाती बीकानेर, राजस्थान में थी। इन दिनों प्रमोशन के लिए उसकी परीक्षाएं चल रही थी। दो फरवरी को दोपहर में जब वह परीक्षा के लिए अपनी सीट देखने कैंप परिसर में गया तो अचानक वह बेहोश होकर गिर गया। साथियों ने शीघ्र इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को दी। उसे सेना अस्पताल में भर्ती कराया गया। प्राथमिक उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
रोहित एक माह की छुट्टी बिताकर 17 जनवरी को ही बीकानेर लौटा था। अपने परिवार का रोहित ही एकमात्र सहारा था। उसकी बड़ी बहिन किरन की तीन माह पूर्व ही शादी हुई थी। रोहित की मौत की खबर जैसे ही गांव में पहुंची तो गांव में मातम छा गया।