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देखिए, हार के बाद 'काफल' पार्टी कर रहे हैं हरीश रावत

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 11 Jun 2017 12:04 PM IST

सार

चेहरे से हार की शिकन मिटाने में जुटे हरीश रावत  
पहले धरना, फिर तप और अब काफल पार्टी  
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सीएम हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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विस्तार
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत विधानसभा सभा चुनाव में मिली करारी शिकस्त की शिकन मिटाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे। पिछले एक हफ्ते के दौरान उन्होंने पहले धरना दिया, फिर तप किया और शनिवार को काफल पार्टी का आयोजन करके ये संदेश देने का प्रयास किया कि  पहाड़ के एजेंडे को वह मजबूती से पकड़े हुए हैं।
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चुनावी हार के बाद से हरीश रावत सूबे की सियासत में खुद के जिंदा रहने का एहसास दिलाने का प्रयास कर रहे हैं। किसी न किसी बहाने वह सुर्खियों में बने रहने की कोशिश में हैं। कई मौकों पर वह अपनी पार्टी और विधायक मंडल दल से ज्यादा तेजी से फैसले ले रहे हैं। जबकि पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का चुनाव में मात खाने के बाद कुछ अता-पता नहीं है। पूर्व कैबिनेट मंत्रियों की सक्रियता भी नदारद है।  
 

काफल पार्टी के बहाने पहाड़ की बात

harish rawat kafal party - फोटो : amar ujala
आम तौर पर टी-पार्टी, कॉफी पार्टी व मैंगो पार्टी का आयोजन होता है। लेकिन शनिवार को हरीश रावत एक नई पार्टी लेकर आए। ये पार्टी थी, पहाड़ के जंगली फल काफल की।

काफल पार्टी के बहाने हरीश रावत ने अपने पहाड़ के एजेंडे को आगे किया। शनिवार को उन्होंने राजपुर रोड स्थित अपने कैंप कार्यालय में काफल पार्टी का आयोजन किया। पहाड़ी जंगली फल की इस दावत में उन्होंने कुछ ही लोगों को आमंत्रित किया था। पार्टी के बहाने उन्होंने ये संदेश देने का प्रयास किया कि पहाड़ के जिस एजेंडे को लेकर वह चले थे, उसे आसानी नहीं छोड़ने वाले।

पार्टी में विधायक काजी निजामुद्दीन, पीसीसी के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी, प्रवक्ता आरपी रतूड़ी, गरिमा दसौनी, सुरेंद्र कुमार समेत कई अन्य लोग उपस्थित थे।

इंदिरा के नहले पर हरीश का दहला 

इंदिरा ह्दयेश
यूथ जॉब कार्ड के बहाने अपनी ही पूर्व सरकार पर निशाना साधने वाली नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के नहले पर शनिवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने दहला फेंका। काफल पार्टी के दौरान पूछे जाने पर उन्होंने इंदिरा से जुड़े एक सवाल बड़े ही चुटीले अंदाज में जवाब दिया।

उन्होंने कहा, ‘इंदिरा जी वरिष्ठ नेत्री हैं। पांच साल उन्होंने हमारी सरकार का मार्गदर्शन किया। अब पांच साल वह त्रिवेंद्र सरकार का मार्गदर्शन करेंगी। बता दें कि इंदिरा ने शुक्रवार को बजट पर चर्चा में पूर्व सरकार के यूथ जॉब कार्ड के मुद्दे को गलत करार दिया था।

‘काफ ल फ ल ही नहीं है यह हमारी संस्कृति, परंपरा व बेटी के अपने मायके से रिश्ते का प्रतीक है। मैं चाहता हूं कि इस परंपरा से जुड़े और इस परंपरा को आगे भी बढ़ाएं।
-हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंत्री
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