हरिद्वार में मातृ सदन की याचिका पर हाइकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव एस रामास्वामी से पूछा है कि क्यों न मुख्य सचिव सहित अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ अवमानना का मामला तय किया जाए।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष रायवाला से भोगपुर के बीच गंगा नदी के पांच किलोमीटर के दायरे में स्टोन क्रशर और खनन बंद करने से संबंधित मातृ सदन की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि पूर्व के आदेश का पालन नहीं किया गया।
मातृ सदन के ब्रह्मचारी दयानंद ने हाइकोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर कहा था कि हाइकोर्ट की खंडपीठ ने छह दिसंबर 2016 को आदेश पारित कर गंगा नदी के किनारे पांच किलोमीटर के दायरे में स्टोन क्रशर व खनन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसका पालन करने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तीन मई 2017 को उत्तराखंड सरकार से कहा था। सरकार ने इस आदेश का पालन नहीं किया। कोर्ट के मुख्य सचिव एस रामास्वामी और अन्य से पूछा कि क्यों न आपके खिलाफ अवमानना का मामला तय किया जाए। कोर्ट ने इस संबंध में उन्हें चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।