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उत्तराखंड में एचआईवी के 592 मरीज गायब, इस वजह से नहीं मिल पा रही उनकी जानकारी

राजीव शुक्ला, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 18 Apr 2019 12:03 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रदेश में एचआईवी के 592 मरीज गायब हो गए हैं। इन मरीजों की आईडी न होने के कारण उनकी जानकारी नहीं मिल पा रही है। देहरादून और हल्द्वानी में एंटी रेटरोवायरल थैरेपी (एआरटी) सेंटर हैं। एचआईवी पीड़ित इन्हीं सेंटरों में आते हैं।

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इनकी जांचों के बाद मरीजों की दवा शुरू की जाती है। देहरादून के एआरटी सेंटर से इलाज कराते-कराते ही 374 मरीज गायब हो गए। हल्द्वानी के एआरटी सेंटर से 218 मरीज गायब हो गए। इसके अलावा, दस लोगों ने ट्रीटमेंट बंद कर दिया, जबकि 3977 एचआईवी पीड़ित अभी एआरटी सेंटर में इलाज करवा रहे हैं। 

कहां के कितने मरीज गायब
जिला मरीज
अल्मोड़ा 19
बागेश्वर 28
चमोली 17
चंपावत 14
नैनीताल 36
पौड़ी 23
पिथौरागढ़ 34
हरिद्वार 100
रुद्रप्रयाग 22
ऊधमसिंह नगर 72
उत्तरकाशी 17
देहरादून 88
टिहरी 41
अन्य राज्यों से 81

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मरीजों को दवा के लिए आईडी से जोड़ने का भेजा है प्रस्ताव

गोपनीयता के चलते एचआईवी मरीजों से आईडी नहीं ली जाती है। साथ ही ऐसे मरीजों को किसी आईडी से भी नहीं जोड़ा गया है। उत्तराखंड राज्य एड्स नियंत्रण सोसायटी के अपर परियोजना निदेशक डॉ. अर्जुन सिंह सेंगर ने बताया कि मरीजों को आईडी से जोड़ने के लिए प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा है।

केंद्र सरकार के दिशानिर्देश के अनुसार काम किया जाएगा। उन्होंने बताया कि दवा छोड़कर गायब हुए मरीजों को एनजीओ की मदद से ओआईडब्ल्यू (आउट रीच वर्कर) के माध्यम से खोजने का प्रयास किया जाएगा।
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