उत्तराखंड दूसरे राज्यों की तुलना में आकार में बेशक छोटा है, लेकिन उसके सपने छोटे नहीं है। इस बार प्रदेश केंद्रीय बजट में कुछ खास चाहता है। पलायन के दर्द से जूझ रहे पर्वतीय राज्य कृषि, औद्योगिक और पावर सेक्टर कठिन दौर से गुजर रहा है। हर बार की तरह इस बार भी सरकार इन तीन महत्वाकांक्षी सेक्टर में केंद्र से बड़ी घोषणा की उम्मीद कर रही है।
बजट में अब वो चार्म नहीं
केंद्र सरकार के बजट का सबसे बड़ा आर्कषण वस्तुओं के सस्ते और महंगे होने को लेकर था, लेकिन अब अप्रत्यक्ष कर वाला हिस्सा जीएसटी में है। अब समय-समय पर जीएसटी काउंसिल के फैसलों से वस्तुओं का मूल्य तय होता है।
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इस बार बड़ा चाहता है उत्तराखंड
trivendra singh rawat
प्रदेश सरकारों के लिहाज से अब आम बजट में मुख्य फोकस केंद्रीय योजनाओं से जुड़ा है। प्रदेश में भी भाजपा की सरकार होने की वजह से उस पर केंद्रीय इमदाद ज्यादा से ज्यादा हासिल करने का बड़ा दबाव है।
एक फरवरी को केंद्र सरकार संसद में आम बजट पेश करेगी। मोदी सरकार के कार्यकाल का यह आखिरी बजट माना जा रहा है। इसलिए प्रदेश सरकार को केंद्रीय वित्त मंत्री से इस बार काफी उम्मीदें हैं। प्रदेश सरकार आम बजट में कुछ ऐसी घोषणाएं चाहती है, जिनसे उसकी कृषि, उद्योग और पावर सेक्टर से जुड़ी समस्याओं का समाधान हो जाए।
पहाड़ के लिए अलग औद्योगिक नीति
trivendra singh rawat
प्रदेश सरकार केंद्र से यह उम्मीद कर रही है कि वह हिमालयी राज्यों के लिए अलग से औद्योगिक नीति की घोषणा करे। इस नीति से पर्वतीय क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश की संभावना बढ़ेगी, जिससे वहां रोजगार के अवसर सृजित होंगे। पर्वतीय क्षेत्रों की आर्थिकी को मजबूती मिलेगी। प्रदेश सरकार नीति आयोग के समक्ष यह मांग उठा चुकी है। विशेष औद्योगिक पैकेज समाप्त हो जाने के बाद से प्रदेश में औद्योगिक इकाइयां बोरिया बिस्तर समेटने की तैयारी में है। उद्योगों को रोकने और नए निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदेस को केंद्र से विशेष पैकेज की दरकार है।
उद्योग और निवेश दोनों का विस्तार
वर्ष-सूक्ष्म एवं लघु उद्योग-निवेश
2000-01-15,282-707.39 करोड़
2016-17-52,487-11,221.13 करोड़
बडे़ उद्योगों में निवेश
2000-01- 40-8,322 करोड़
2016-17-273-35,225 करोड़