लोकसभा चुनाव से ठीक पहले उत्तराखंड में भाजपा और सरकार के बीच कानूनी जंग शुरू होती दिख रही है। त्रिपाठी जांच आयोग की रिपोर्ट के खिलाफ पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक ने दो सप्ताह पहले हाईकोर्ट में दस्तक दी थी।
इसके बाद कोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी कर इस संबंध में जवाब दाखिल करने को कहा था। शासन की टीम ने नैनीताल पहुंचकर बृहस्पतिवार को इस मामले में जवाब दाखिल कर दिया।
घोटालो की जांच कर रहा आयोग
राज्य में कांग्रेस सत्ता में आई तो भाजपा राज के कथित घोटालों की जांच के लिए एक आयोग का गठन हुआ। इसमें कई मामले सीधे पूर्व सीएम निशंक से जुड़े थे।
आयोग ने पहले तराई एवं बीज विकास निगम की जांच रिपोर्ट सरकार को दी। जिसमें पूर्व सीएम निशंक समेत कई पर दोष साबित किए गए।
रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने करवाई विवेचना
रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने अज्ञात के नाम एफआईआर दर्ज कराकर विवेचना शुरू कर दी। इसके बाद हाइड्रो प्रोजेक्ट्स आवंटन मामले की जांच के दौरान पूर्व सीएम बीसी खंडूड़ी व रमेश पोखरियाल निशंक के अलावा पूर्व मुख्य सचिव एनएस नपलच्याल, सीएम के पूर्व प्रमुख सचिव शत्रुघ्न समेत कई अफसरों को नोटिस जारी किए गए। इसके अलावा सिटूर्जिया की रिपोर्ट भी आयोग ने सरकार को सौंप दी।
आयोग की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट गए निशंक
आयोग की कार्रवाई के खिलाफ दो सप्ताह पहले निशंक ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। तर्क दिया गया कि जब हाइड्रो व सिटूर्जिया मामले का निस्तारण हाईकोर्ट से हो चुका है और सरकार अपने फैसले वापस ले चुकी है तो फिर आयोग गठित कर जांच की क्या जरूरत है।
सरकार पर आरोप लगाया कि यह पूरी कार्रवाई राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने के लिए की जा रही है। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर सरकार को अपना पक्ष रखने के लिए कहा था।