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दो बजते ही गायब हो रही नर्सें, मरीजों में हड़कंप

अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Sep 2013 11:04 AM IST
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दोपहर के दो बजते ही राजधानी देहरादून में नर्सें अस्पतालों से गायब हो रही हैं। जिससे मरीजों में हड़कंप मचा हुआ है।
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नर्सों की हड़ताल का खामियाजा सोमवार को 60 वर्षीय कमला देवी को भुगतना पड़ा। उनकी आंख के मोतियाबिंद का आपरेशन होना था। इसके लिए आपरेशन से पहले की तैयारी हो चुकी थी। लेकिन इसी बीच दो बजने से नर्सें हड़ताल पर चली गई तो कमला का आपरेशन टाल दिया गया।

किसी ने नहीं सुनी
कमला अपनी परेशानी का हवाला देती रहीं, लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। हार कर कमला सीएमएस के पास पहुंची और उन्हें परेशानी बताई। सीएमएस ने उन्हें मंगलवार को आपरेशन कराने का आश्वासन दिया है। नर्सों की हड़ताल की वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों को किस तरह की परेशानी हो रही है कमला उसकी एक बानगी भर हैं।
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हर्रावाला से आई कमला देवी का जब आपरेशन नहीं किया गया तो वह अपनी तकलीफ बयां करने सीएमएस के पास पहुंची। उनका आरोप था कि उसकी स्थिति देखने के बावजूद कोई ध्यान नहीं दिया गया। उन्हें पुन: हर्रावाला से आना होगा। उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की पदाधिकारी जब सीएमएस के पास पहुंची, उस वक्त कमला वहीं थी।

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सीएमएस ने मोतियाबिंद के आपरेशन में महज 7-8 मिनट लगने की बात दोहराते हुए कमला का आपरेशन मंगलवार को कराने की बात कही। उधर, उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की अध्यक्ष अंजना भौमिक ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में है। दो बजे आपरेशन थिएटर में एक मरीज था, उसका आपरेशन पूरा करने के बाद नर्सेज हड़ताल पर गई हैं। कमला देवी का केवल टेस्ट हुआ था।

प्राइवेट अस्पतालों में शिफ्ट हुए मरीज
सभी सरकारी अस्पताल इंटर्न के हवाले हैं। इसके चलते कुछ मरीज जहां इलाज के बीच में ही अस्पताल छोड़कर चले गए हैं, वहीं नए मरीज आने से कतरा रहे हैं। उन्होंने प्राइवेट अस्पतालों का रुख कर लिया है।

यह हैं नर्सों की प्रमुख मांगें
-सचिवालय में अपर निदेशक और संयुक्त निदेशक का पद सृजित हो
-उप-निदेशक के पद को नर्सिंग स्टाफ से पदोन्नति से भरा जाए
-नर्सिंग काडर के बाद पहली पदोन्नति राजपत्रित के रूप में की जाए
-छठा वेतनमान एक जनवरी, 2008 से लागू हो, यह 2011 से लागू है
-वाहन भत्ता स्वीकृत किया जाए

26 से सुबह की शिफ्ट नहीं करेंगी नर्सें
नर्सों की हड़ताल यदि जारी रही तो मरीजों की मुश्किलें 26 सितंबर से और बढ़ जाएंगी। नर्सों ने इस दिन से सुबह की शिफ्ट में कार्य नहीं करने का फैसला लिया है। वह सीएमएस डा. आरएस असवाल के ‘हड़ताल से कहीं कोई दिक्कत नहीं’ के बयान से भड़की थीं।

बयान के विरोध में उन्होंने सोमवार को सीएमएस का घेराव किया। उनका कहना था कि नर्सेज की हड़ताल की वजह से काम-काज प्रभावित है, लेकिन बजाय नर्सों की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी रुख दिखाने के वह इस तरह की बयानबाजी कर रहे हैं।

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उधर, सीएमएस ने नर्सों के रुख को देखते हुए मांगों पर चार माह का समय मांगा, जिसे उन्होंने नकार दिया। कहा कि प्रशासन नर्सों की ताकत को देखना चाहता है, लिहाजा अब सुबह के बजाय इसके बाद वाली शिफ्ट में काम होगा। घेराव करने वालों में उत्तराखंड नर्सेज सर्विसेज एसोसिएशन की अध्यक्ष अंजना भौमिक, दलजीत मिश्रा, कृष्णा आदि शामिल रहे।

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