राजकीय दून मेडिकल कॉलेज के टीचिंग अस्पताल (दून अस्पताल) में लापरवाही बरतने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने दो जूनियर रेजीडेंट (जेआर) डॉक्टर और एक नर्स को सस्पेंड कर दिया। उन्होंने अस्पताल में फैली गंदगी और स्टाफ के रवैये पर सख्त नाराजगी जताते हुए कार्रवाई की चेतावनी दी।
बुधवार रात मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत अचानक दून अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंचे। वहां मरीजों की भीड़ लगी थी जबकि ड्यूटी पर तैनात जेआर डा. मनीष और डा. ध्रुवांचल नदारद मिले। मरीजों को चढ़ाई जा रही ग्लूकोज डिप में दवा खत्म होने के बावजूद लगाई मिली। मरीजों ने बताया कि बताने के बावजूद भी ड्यूटी पर तैनात नर्स फातिमा उसे हटा नहीं रही है। इस पर मुख्यमंत्री रावत ने दोनों जेआर और नर्स को तत्काल सस्पेंड करने के निर्देश दिए।
इसके बाद मुख्यमंत्री ने ऑर्थो वार्ड का निरीक्षण किया। यहां गंदगी देखकर मुख्यमंत्री का पारा चढ़ गया। उन्होंने इस पर सख्त नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों को सफाई व्यवस्था बेहतर करने और नए शौचालय के निर्माण के लिए प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने भर्ती मरीजों से बातचीत कर उनका हाल-चाल पूछा।
उन्होंने कहा कि मरीजों को हर संभव मदद देने का प्रयास किया जा रहा है। गंभीर मरीजों को मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी मदद दी जा सकती है। बाद में प्रभारी चिकित्साधीक्षक डा. केसी पंत को उन्होंने व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था न सुधरने और लापरवाही करने वालों के खिलाफ एक्शन लिया जाएगा। वरिष्ठ आंदोलनकारी मोहन खत्री ने मुख्यमंत्री के सामने जिला अस्पताल और खराब पड़ी लिफ्ट को ठीक करने का मामला उठाया, जिस पर उन्होंने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया।