मैदान में पूरे तरीके से काशी सिंह ऐरी धड़ा ही उतरा है। त्रिवेंद्र पंवार का खेमा दो सीटों पर सिमट कर रह गया है।
चुनाव से पहले निकल कर आए कुछ मौकापरस्त धड़े अब गायब हो गए हैं। उक्रांद डेमोक्रेटिक, यूनाइटेड जैसे खेमे फिर पर्दे के पीछे चले गए हैं। इन सारे समीकरणों में दिवाकर भट्ट भी अब कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
आयोग में भी लड़ रही है यूकेडी
उत्तराखंड क्रांति दल के असली नकली की लड़ाई निर्वाचन चुनाव आयोग में चल रही है। एकता के लिए कुछ बैठकों में सक्रिय रहने पर त्रिवेंद्र और ऐरी से जब बात नहीं बनी तो दिवाकर ने किनारा कर लिया है।
एक बार फिर उनकी भाजपा को समर्थन देने की बात समय समय पर आती रही है। अभी तक त्रिवेंद्र सिंह पंवार के अधीन चल रहा उक्रांद आयोग में मजबूत रहा है, लेकिन पंवार के अब कई साथी काशी सिंह ऐरी के साथ हो लिये हैं।
ऐरी ने एक वर्ष में अपना संगठन मजबूत किया है जिसके चलते पांचों सीटों पर उन्होंने प्रत्याशी उतारे हैं। दोनों धड़ों के अलावा तीसरा कोई खेमा सीधे तौर पर चुनाव में नहीं उतरा है।
हालांकि चुनाव से ठीक पहले उक्रांद यूनाइटेड के नाम से उतरा राणा राजबीर सिंह और डेमोक्रेटिक और प्रजातांत्रिक खेमा चुनाव में प्रत्याशी उतारने का दावा कर दावा ठोकते दिखे। यह धड़े किसी न किसी अन्य राष्ट्रीय दल को समर्थन देने की बात कर अब शांत हो गए हैं।
पहचान का संकट गहराया
दोनों खेमे एक दूसरे के खिलाफ पार्टी झंड़ा इस्तेमाल करने की शिकायत कर चुके हैं। हालांकि दोनों ही उक्रांद संस्थापक डीडी पंत और दल को आगे बढ़ाने वाले इंद्रमणि बड़ौनी के नाम से प्रचार कर रहे हैं। दोनों ही खेमों ने जो चुनाव घोषणा पत्र जारी किये के पहले पन्ने पर दोनों नेताओं के फोटो हैं।
चुनाव बाद निकलेगा हल चुनाव आयोग के पत्र में साफ किया है कि विवाद दल के पदाधिकारियों को लेकर है। असली पदाधिकारी तय नहीं होने तक उनके प्रत्याशियों को निर्दलीय करार दिया है।
अब दोनों दल अपनी केंद्रीय कार्यकारिणी मजबूत करने में लगे हैं। त्रिवेंद्र पंवार खेमे से अलग हुए कार्यकारी अध्यक्ष एपी जुयाल भी आयोग में चलने वाले वाद में अहम भूमिका निभाएंगे।