केंद्र ने सात राज्यों को किया है चिह्नित।
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दिव्यांग प्रमाणपत्र को आधार कार्ड से जोड़कर यूनिवर्सल दिव्यांग प्रमाणपत्र बनाया जाएगा, जो पूरे देश में मान्य होगा। इसके जरिये एक राज्य के दिव्यांग को दूसरे राज्यों में भी सहूलियतें मिल सकेंगी। यूनिवर्सल दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने के लिए केंद्र सरकार ने देश के सात राज्यों को चिह्नित किया है। कुछ समय बाद अन्य राज्यों को भी शामिल किया जाएगा। यह जानकारी सोमवार को मुख्य आयुक्त निशक्तजन डॉ. कमलेश कुमार पांडेय ने दी।
डॉ. पांडेय ने सचिवालय में मीडियाकर्मियों को बताया कि निशक्तजनों से संबंधित बिल राज्यसभा में है। इसके पास होने के बाद दिव्यांगता के 18 प्रकार हो जाएंगे। अभी दिव्यांगता के सात प्रकार हैं। दिव्यांगता आरक्षण का प्रतिशत तीन से बढ़कर पांच हो जाएगा। 40 प्रतिशत विकलांगता पर समान पेंशन मिलेगी। अभी अलग-अलग दिव्यांगता प्रतिशत पर पेंशन धनराशि कम अधिक होती है।
डॉ. पांडेय ने बताया कि उत्तराखंड में अभी सिस्टम पूरी तरह बन नहीं पाया है। मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह और अन्य सचिवों की बैठक में उन्होंने बताया कि शासन से कहा गया है कि दिव्यांगता विभाग में पूर्णकालिक अधिकारी नियुक्त किए जाएं। लोगों को सरकारों की योजनाओं के संबंध में बताया जिससे वे लाभ ले सकें।
दिव्यांगों को उपकरण मुहैया कराने के लिए कानपुर स्थित एल्मिको का 238 करोड़ से आधुनिकीकरण कराया जा रहा है। एल्मिको ने दो साल में 1850 शिविर लगाकर 225 करोड़ कीमत के उपकरण चार लाख, 40 हजार दिव्यांगों को बांटे हैं। दिव्यांगों के लिए छात्रवृत्ति, कौशल विकास योजना शुरू की गई है।