तेरह साल पुराने सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के विवाद में उत्तराखंड को काफी हद तक सफलता मिली।
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यूपी ने उत्तराखंड को 41 नहरों का मालिकाना हक सौंपते हुए ट्रासफर कर दी है। और उत्तराखंड ने भी आठ नहरों को यूपी के हवाले कर दिया है। उत्तराखंड को अब सालाना ढाई करोड़ रुपए के राजस्व का भी फायदा होगा जो कि अभी तक यूपी वसूलता था।
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पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित गंगा मैनेजमेंट बोर्ड की केंद्रीय सचिव की अध्यक्षता में आयोजित दोनों प्रदेशों के अफसरों की बैठक की जानकारी मंगलवार को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने दी।
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उन्होंने कहा कि बैठक में तय हुआ कि ऐसी नहरें जिन पर यूपी का नियंत्रण हैं लेकिन जिनका हैड और टेल दोनों उत्तराखंड में हैं, उन्हें उत्तराखंड को सौंप दिया जाए और यूपी में कुछ नहरें जिनका हैड और टेल यूपी में ही हैं उन्हें भी ट्रांसफर कर दिया जाए।
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दोनों प्रदेशों के अफसरों की सहमति बनी और इस बाबत अधिसूचना जारी हो गई। इस तरह से यूपी ने उत्तराखंड को 41 और उत्तराखंड ने यूपी को 8 नहरें ट्रांसफर कर दी हैं।
खास बातें
- हरिद्वार की 28 नहरें जिनकी लंबाई 128 किमी. है, यूएसनगर में 13 नहरें जिनकी लंबाई 66 किमी. हैं, यूपी ने उत्तराखंड को सौंपी है।
- यूपी की आठ नहरें जिनकी लंबाई 28.45 किमी. हैं और जो अभी तक उत्तराखंड के कब्जे में थी, उन्हें यूपी को ट्रांसफर कर दिया गया।
यह निर्णय लागू हो चुका है, 41 नहरों का किसानों से मिलने वाला राजस्व भी अभी तक यूपी को जाता था। लेकिन अब वह उत्तराखंड के खजाने में आएगा। इसके बाद अब शेष परिसंपत्तियों को लेकर एक्सरसाइज शुरू होगी।
- अजय प्रद्योत, सचिव सिंचाई