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अब खेती के लिए पट्टे पर दे सकेंगे जमीन, पढ़ें कैबिनेट फैसले

ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 29 Oct 2016 01:35 AM IST
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हरीश रावत - फोटो : AmarUjala
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राज्य के किसान और भूमिधर अब अपनी जमीन किसी भी व्यक्ति को खेती और पशुपालन के लिए तीस साल की अवधि के लिए पट्टे पर दे सकेंगे। बृहस्पतिवार को हुई कैबिनेट बैठक में उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम -1950 में राजस्व विभाग के संशोधन संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।
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इसके साथ ही कैबिनेट ने राजस्व विभाग के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य के बाहर के किसी भी व्यक्ति को उत्तराखंड में 250 वर्ग मीटर की जगह 500 वर्ग मीटर जमीन खरीदने की अनुमति देने की मांग की गई थी।

जमीन देने से पलायन रोकने में होगी मदद
सरकार और राजस्व विभाग का मानना है कि जमीन पट्टे पर देने के फैसले से जहां पहाड़ों से पलायन रोकने में मदद मिलेगी, वहीं खेतीबाड़ी को भी बढ़ावा मिल सकेगा। राजस्व विभाग की ओर से कैबिनेट में प्रस्तुत किए गए प्रस्ताव में कहा गया था कि राज्य की परिवर्तित परिस्थितियों, पर्वतीय इलाकों में तेजी से हो रहे पलायन, शहरी क्षेत्रों में तेजी से बढ़ती आबादी, जोतों के छोटे आकार के चलते खेतीबाड़ी चौपट हो गई है। जमीनें बंजर हो रही हैं।
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ऐसे में किसानों को इस बात की अनुमति दी जाए कि वे अपनी जमीन कृषि, बागवानी, जड़ी बूड़ी उत्पादन, बेमौसमी सब्जियों, सुगंधित फूलाें के उत्पादन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन के लिए दें सकें। राजस्व विभाग के इस प्रस्ताव पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी। इस जमीन पर कोई उद्योग नहीं लगाया जा सकेगा।
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