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उत्तराखंड मेरा घर, कैसे रह सकता हूं दूर: हरीश रावत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 22 Jul 2018 11:54 AM IST
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harish rawat - फोटो : google
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कांग्रेस के नवनियुक्त केंद्रीय महासचिव और असम प्रभारी हरीश रावत अपनी नई भूमिका के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं। 26 जुलाई को वह असम जा रहे हैं। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद एक समय उन्हें हाईकमान से तवज्जो न मिलने की बातें कही जा रही थीं, मगर कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) में जगह, केंद्रीय महासचिव का पद और असम के प्रभार ने जता दिया है कि हरीश को कांग्रेस अब भी उपयोगी मानती है। नए दायित्वों से ये सियासी अंदाज भी लगाए गए कि रावत को असम में व्यस्त करके हाईकमान ने उन्हें उत्तराखंड की सियासत से दूर कर दिया है, ताकि टकराव के लिए गुंजाइश ही न बचे। हालांकि हरीश रावत ऐसी बातों पर तीखी प्रतिक्रिया देते हैं। वह ये भी कहते हैं-उत्तराखंड मेरा घर है। मैं यहां से दूर कैसे रह सकता हूं। नई जिम्मेदारी, कांग्रेस संगठन की स्थिति आदि विषय पर अमर उजाला के प्रमुख संवाददाता विपिन बनियाल ने हरीश रावत से बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश:

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सवाल: नई जिम्मेदारी को किस तरह से देखते हैं। कितनी चुनौती मानते हैं।
जवाब-इसके लिए मैं आभारी हूं हाईकमान का। असम एक अहम राज्य है। बात सिर्फ इतनी भर नहीं है कि हम वहां लोकसभा या विधानसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करें। विषय देश की सुरक्षा का भी है। हम वहां हमेशा मजबूत रहे। मौजूदा स्थिति में फिर से कांग्रेस को मजबूत करना है।

सवाल: बिना किसी खास जिम्मेदारी के भी आप उत्तराखंड में भाजपा पर मजबूत प्रहार करते रहे। अब कांग्रेस के हमले प्रभावित नहीं होंगे।
जवाब-मैने बिना किसी हथियार के भी कांग्रेस को डेढ़ साल में सक्रिय रखा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं और वोटरों को बांधे रखने का प्रयास किया। उत्तराखंड कांग्रेस आज यदि सक्रिय रूप में नजर आ रही है, तो कहीं न कहीं मेरा योगदान भी रहा है। इसे आप कितना आंकते हैं, ये अलग बात है। हम लोकसभा की पांचों सीट जीतने की स्थिति में आ गए हैं। हमारे पास अच्छे नेता हैं। मुझे उम्मीद है कि लोकसभा चुनाव में हम भटकेंगे या फिसलेंगे नहीं, बल्कि जीत हासिल करेंगे।
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सवाल: ये भी कहा जा रहा है कि आपका कद तो बढ़ाया, लेकिन असम इसलिए भेज दिया, ताकि उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर टकराव खत्म किया जा सके।
जवाब-ऐसी मानसिक विकृति से ज्यादा कुछ नहीं है। मैने मंदिरों में भजन-कीर्तन, हरेला प्रतियोगिता, काफल पार्टी जैसे असामान्य आयोजन किए, इससे टकराव वाली बात के लिए कहां गुंजाइश थी। उत्तराखंड हमारी धरती है। मेरा घर है। इससे दूर कैसे रह सकता हूं। राज्य बनाने में हमारा भी योगदान रहा है। हमने लोगों का गुस्सा भी झेला, लेकिन डटे रहे। पार्टी की मजबूती के लिए योगदान करता रहूंगा।

सवाल: आपको बड़ी जिम्मेदारी मिलने से पहले नेता प्रतिपक्ष डॉ.इंदिरा हृदयेश ने आपको लेकर कुछ सवाल उठाए थे।
जवाब-मैं ऐसी बातों को न तो पढ़ता हूं और न ही सुनता हूं। मेरा मानना है कि हमारी लड़ाई विकट है, साथ-साथ तो चलना ही पडे़गा। 

सवाल: आपकी सरकार में पारित मलिन बस्तियों से संबंधित एक्ट में अब खामियां गिनाई जा रही हैं। मलिन बस्ती बड़ा मुद्दा बन रही हैं।
जवाब-भाजपा सरकार इस बात का इंतजार कर रही है कि अतिक्रमण विरोधी अभियान की आड़ में बस्तियों को हटा दिया जाए। जमीन खाली हाें, तो अपने चहेतों को दे दी जाए। अगर सरकार की मंशा साफ होती तो वह हमारे एक्ट का आधार लेकर हाईकोर्ट जा सकती थी। मगर ऐसा नहीं किया गया।

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