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इंदिरा हृदयेश: अब उत्तराधिकारी के लगने लगे कयास, हर जुबां पर चर्चा, कौन जीतेगा हल्द्वानी के लोगों का दिल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 14 Jun 2021 11:17 PM IST

सार

कांग्रेस में इस सीट से कौन प्रतिनिधित्व करेगा, यह बड़ा सवाल है। हालांकि. पार्टी के बड़े नेता इस पर कुछ भी कहने से बच रहे हैं।
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इंदिरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश के निधन के बाद अब उनके उत्तराधिकारी को लेकर कयास लगने शुरू हो गए हैं। हर जुबां पर चर्चा है कि हल्द्वानी सीट पर लोगों का दिल कौन जीतेगा। हल्द्वानी विधानसभा सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा है। इस सीट से डॉ. इंदिरा हृदयेश कई बार विधायक चुनी गईं। उन्होंने 2002, 2012 और 2017 का चुनाव जीता था। सिर्फ 2007 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था।

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प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव का कहना है कि जो भी उनके सपने थे, पार्टी उनको पूरा करने की कोशिश करेगी। पूर्व सीएम हरीश रावत का कहना है कि डॉ. इंदिरा हृदयेश को लेकर स्मृति हल्द्वानी के लोगों के मन में बहुत लंबे समय तक रहेगी। इसलिए कांग्रेस के लिए यहां कोई दिक्कत नहीं है। अभी तो यहां सुमित हृदयेश काम कर रहे हैं।

ऑटोबायोग्राफी लिखने की हसरत रह गई अधूरी
नेता प्रतिपक्ष की ऑटोबायोग्राफी लिखने की इच्छा अधूरी रह गई। वह अपने जीवन के अनुभवों को शब्दों के जरिये अभिव्यक्त करना चाहतीं थीं। डॉ. इंदिरा हृदयेश के साथ रहने वाले नीरज जोशी बताते हैं कि करीब दो साल पहले उन्होंने ऑटोबायोग्राफी लिखने की इच्छा जाहिर की थी। डॉक्यूमेंट्री बनाने की बात भी हुई थी। इसे लेकर कुछ कोशिश भी शुरू हुई थी। कुछ किताबों को उन्होंने पढ़ना शुरू किया। ऑटोबायोग्राफी को लेकर कुछ चीजों को जुटाने की कोशिश भी शुरू हुई थी पर यह हसरत अधूरी रह गई।

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इंदिरा हृदयेश के नाम पर कुछ न कुछ किया जाएगा : सीएम

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने कहा कि इंदिरा हृदयेश ने प्रदेश में काफी काम किया है। उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। उनके नाम पर प्रदेश में कुछ न कुछ किया जाएगा। आईएसबीटी सहित उनके अन्य अधूरे कार्यों को पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत इंदिरा हृदयेश को श्रद्धांजलि देने के लिए सोमवार की सुबह हल्द्वानी पहुंचे। उनका हेलिकॉप्टर आठ बजकर 29 मिनट पर गौलापार स्टेडियम में उतरा। आठ बजकर 35 मिनट पर वह नेता प्रतिपक्ष के आवास पर पहुंचे। उन्होंने इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित हृदयेश को ढाढ़स बंधाया। 

पत्रकारों से बातचीत में सीएम ने कहा कि इंदिरा जी का जाना प्रदेश के लिए बड़ी क्षति है। इसकी भरपाई करना मुश्किल है। वह हमेशा प्रदेश के विकास के लिए लड़तीं थीं। वह बड़ी बहन के रूप में बराबर उनका हौसला बढ़ातीं थीं। उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली की राजनीति में भी उनकी अच्छी पकड़ थी। चार दिन पहले उनसे कोविड के मुद्दे पर बातचीत हुई थी। मुख्यमंत्री बनने के बाद उनसे 10-12 बार कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी। लॉकडाउन के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में बैठक के बाद निर्णय लिया जाएगा। 

मुख्यमंत्री के आने से पहले भीड़ को पुलिस ने हटाया 
मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत के आने से चंद मिनट पहले ही पुलिस अधिकारियों ने भीड़ को हटाया। श्रद्धांजलि देने के लिए वहां भीड़ जमा हो गई थी। इंदिरा हृदयेश के आवास पर करीब दस मिनट रहने के बाद मुख्यमंत्री देहरादून के लिए चले गए।
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