दिल्ली उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) ने फेसबेक नामक कन्फेक्शनरी के मालिक को किसी भी ऐसे चिह्न का इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया है, जो भ्रामक रूप से सोशल मीडिया कंपनी मेटा के मंच फेसबुक के चिन्ह से मिलता हो।
न्यायमूर्ति नवीन चावला ने मेटा की एक याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि फेसबुक देश में एक प्रसिद्ध ट्रेडमार्क है और फेसबेक के मालिक नोफेल मलोल द्वारा अपनाया गया चिह्न अनुचित लाभ पाने के लिए दुर्भावनापूर्ण इरादे को दर्शाता है।
अदालत ने कहा कि फेसबुक के समान चिह्न के उपयोग से एक अनजान उपभोक्ता को प्रतिवादी पर ध्यान देने में कम दिलचस्पी हो सकती है, क्योंकि उसे लगेगा कि इसका वादी (फेसबुक) के साथ किसी प्रकार का संबंध है। उन्होंने कहा कि ऐसा में प्रतिवादी (फेसबेक) की दुर्भावनापूर्ण मंशा भी स्पष्ट है।
इससे पहले प्रतिवादी ने फेसबेक के इस्तेमाल के खिलाफ एक अंतरिम आदेश पारित होने के बाद अपने चिह्न को फेसकेक में बदल दिया और मुकदमे का बचाव नहीं करने का फैसला किया। अदालत ने कहा कि इससे भी प्रतिवादी की दुर्भावना प्रकट होती है। अदालत ने प्रतिवादी, उसकी सहायक कंपनियों, सहयोगियों के साथ ही उसके लिए काम करने वाले किसी भी व्यक्ति को ऐसे किसी चिह्न, डोमेन नाम और ईमेल पते का इस्तेमाल करने से स्थायी रूप से रोक दिया, जिसमें फेसबेक, फेसकेक या फेसबुक से मिलता-जुलता कोई भी चीज शामिल हो।