'जवाबदेही तय हुए बिना समस्या नहीं रुकेगी'
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच नीट यूजी मामले से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें एक याचिका नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को बदलने या उसके पुनर्गठन की मांग से भी जुड़ी है, ताकि मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए एक मजबूत और स्वायत्त संस्था बनाई जा सके।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'असल समस्या तब तक खत्म नहीं होगी, जब तक वास्तविक जवाबदेही तय नहीं होगी।' कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि इस तरह की घटनाएं होती हैं, तो इसका गहरा असर छात्रों और उनके परिवारों पर पड़ता है, क्योंकि वे इस परीक्षा से भावनात्मक रूप से जुड़े होते हैं।
सरकार गंभीर, पीएम मोदी कर रहे निगरानी: सॉलिसिटर जनरल
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि केंद्र सरकार छात्रों की चिंताओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इस पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं ताकि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की कमी न रह जाए।
मेहता ने कोर्ट को यह भी जानकारी दी कि 21 जून को होने वाली नीट यूजी री-टेस्ट परीक्षा के लिए कुछ नई सुरक्षा व्यवस्थाएं और तंत्र लागू किए गए हैं।
केंद्र सरकार से मांगा हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में केंद्र सरकार को हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने मामले की अगली सुनवाई जुलाई के दूसरे सप्ताह में तय की है।
3 मई को हुई थी परीक्षा, बाद में रद्द हुई
गौरतलब है कि मेडिकल कोर्सेज में दाखिले के लिए नीट यूजी परीक्षा इस साल 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने 12 मई को परीक्षा रद्द कर दी थी। अब दोबारा परीक्षा 21 जून को कराई जाएगी। पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है।