एक तरफ तो अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर तमाम विचार-विमर्श हुए और तरक्की की बातें हुईं। लेकिन दूसरी तरफ सेंसर बोर्ड द्वारा फिल्म ‘क्वीन’ में अपनाए दोहरे मापदंड ने लोगों को आश्चर्य में डाल दिया। फिल्म के एक दृश्य में ब्रा दिखने पर सेंसर बोर्ड ने आपत्ति की और निर्देशक विकास बहल से कहा कि दृश्य में ब्रा को धुंधला कर दें।
उल्लेखनीय है कि मौज-मस्ती के एक सीन में कंगना और लीजा हेडन जब पार्टी के लिए क्लब में पहुंचती हैं तो लीजा खुद को ब्रा से आजाद कर लेती है। सेंसर को लाल रंग की यह ब्रा बहुत भड़कीली लगी और उसने इसे धुंधला करने का फरमान सुना दिया।
वैसे आश्चर्य की बात है कि फिल्म के एक अन्य दृश्य में सेंसर ने ब्रा के दिखाए जाने पर आपत्ति नहीं की और न ही एम्सटर्डम के एक सेक्स टॉय्ज की दुकान में फिल्माए दृश्यों को ज्यों का त्यों रहने दिया।
फिल्म से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सेंसर बोर्ड का फैसला आश्चर्य में डालने वाला था, लेकिन हम फिल्म के लिए कोई मुश्किल नहीं चाहते थे। अतः हमने मान लिया। सूत्र कहते हैं कि हिंदी सिनेमा में कोई पहली बार अंतःवस्त्र नहीं दिखाए गए।
फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ तक में सीन था कि काजोल की सूटकेट से ब्रा गिर जाती है और शाहरुख खान इस पर हंसते हैं। सेंसर को उस पर कोई आपत्ति नहीं थी। जबकि ‘क्वीन’ में तो ब्रा पर न कोई टिप्पणी की गई थी और न ही उसे देख कर किसी को हंसी आ रही थी।
हमने तो सिर्फ इतना दिखाया कि जब लीजा ब्रा उतार देती हैं तो कंगना अपने बैग में रख लेती हैं। इसमें खराब क्या है?
वैसे निर्देशक विकास बहल का कहना है कि वह इस मामले को मुद्दा नहीं बनाना चाहते क्योंकि फिल्म में कई ऐसे सीन हैं, जिन पर सेंसर चाहता तो आपत्ति कर सकता था। लेकिन सेंसर ने फिल्म की मूल भावना को समझा और उसके अनुसार यू/ए प्रमाणपत्र दिया।