काम ठप कर लगातार 17 दिन से हड़ताल पर जमे लेखपालों के खिलाफ सख्ती बढ़ती जा रही है। शुक्रवार को जिले के पांच और लेखपालों को निलंबित किए जाने के साथ ही 24 को सर्विस ब्रेक व नो-वर्क नो-पे का नोटिस दिया गया। अब तक कुल 32 लेखपालों को निलंबित और 605 को सर्विस ब्रेक का नोटिस दिया जा चुका है। उधर, लेखपाल संघ के पदाधिकारियों ने गोरखपुर मंदिर स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय जाकर अपनी मांगों के संबंध में ज्ञापन सौंपा और मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी से मुख्यमंत्री से मुलाकात कराने की मांग की।
लेखपाल संघ के अध्यक्ष नीलकंठ दूबे और मंत्री जगदीश प्रसाद का कहना है कि खुद के साथ ही तमाम विभागों का भी काम देखने वाले लेखपालों की समस्या से किसी का वास्ता नहीं रह गया है। समस्याओं का निस्तारण करने की बजाए शासन-प्रशासन जबरन उनकी आवाज दबाने में जुटा है, मगर लेखपाल पीछे नहीं हटने वाले।
हड़ताल से आमजन परेशान
लेखपालों की हड़ताल से अब संकट गहराता जा रहा है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय और गोरखपुर विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति के अलावा कई अन्य नौकरियों व प्रवेश आदि के लिए अभ्यर्थी जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र बनवाने को लेकर परेशान हैं। तमाम तरह के प्रमाण पत्र समेत मुख्यमंत्री संदर्भ, राजस्व परिषद, कमिश्नर और तहसील दिवस के करीब 24 हजार मामले लंबित हैं। सर्वाधिक परेशानी प्रमाण पत्रों को लेकर हो रही है। हड़ताल से मतदाता पुनरीक्षण अभियान भी प्रभावित हो रहा है। जिले के सभी 665 लेखपाल मतदाता अभियान के सुपरवाइजर हैं।
ये हैं लेखपालों की मांगें
वेतन विसंगति को ठीक करने, वेतनमान बढ़ाने, राजस्व निरीक्षक के पदों में वृद्धि, राजस्व निरीक्षक व नायब तहसीलदार पदों पर पदोन्नति एवं विभागीय परीक्षा के माध्यम से लेखपालों को अधिक अवसर प्रदान करने, पदनाम परिवर्तित कर लेखपाल के स्थान पर उप राजस्व निरीक्षक किए जाने, मोटर साइकिल भत्ता देने, पुरानी पेंशन बहाल करने के साथ ही पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थियों के सत्यापन के लिए पारिश्रमिक उपलब्ध कराना आदि।