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सेना को जमीन देने से प्रशासन का इनकार

Ambala Updated Tue, 02 Apr 2013 05:30 AM IST
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अंबाला। अंबाला स्थित आर्मी की एकमात्र आईटीआई को अपग्रेड करने के तैयार किया गया प्रोजेक्ट के शुरुआती दौर में ही ग्रहण लग गया है। अपग्रेडेशन प्रोजेक्ट के तहत जिला प्रशासन ने सेना को आर्मी आईटीआई के लिए कैंट में मुफ्त जमीन देने से इनकार कर दिया है। प्रशासन के उच्चाधिकारियों का कहना है कि सेना अपनी जमीन पर ही आईटीआई बनवाए। प्रशासन के पास कैंट में निशुल्क देने के लिए जमीन नहीं है। सेना के एक प्रवक्ता के अनुसार आर्मी अफसर के इस मसले पर विचार विमर्श करने के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लेंगे।
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यह है प्रोजेक्ट
सैन्य क्षेत्र में आर्मी आईटीआई है। सेना इसे अपग्रेड करना चाहती है। सेना चाहती है कि आईटीआई सैन्य क्षेत्र से बाहर कैंट के एक बड़े परिसर में इसे स्थापित किया जाए। इसके लिए आर्मी ने जिला उपायुक्त के पास प्रस्ताव भेजकर तकरीबन आठ एकड़ जमीन मांगी थी। सेना प्रवक्ता के अनुसार इसमें सिविल लोगों को भी दाखिले के लिए कुछ न कुछ प्रतिशत सीट जरूर मिलती। लेकिन इस प्रोजेक्ट को शुरुआत में ही जिला प्रशासन ने जमीन न देने की बात कहकर झटका दे दिया है।
सिविलयन को भी मिलता लाभ
आर्मी आईटीआई को जवानों के लिए 1998 में खोला गया था। मकसद था कि विभिन्न रैंक के जवान रिटायरमेंट से पहले ऐसे तकनीकी कोर्स सीख लें, जिसके जरिये वे रिटायर होने पर खुद को स्वावलंबी बना सके। इस आईटीआई ने महज कुछ ही सालों में खुद को इतना अपग्रेड कर लिया कि यहां देश भर की विभिन्न बड़ी कंपनियां स्कील्ड और अनुशासित वर्करों की तलाश में आती है। इसी वजह से अफसर इसे सैन्य क्षेत्र से बाहर निकालकर खुद को एक्सपोज करना चाहती थी। जिसका लाभ निसंदेह सिविलियन लोगों को भी मिलता और वे यहां बढ़िया पढ़ाई कर पाते। इस आर्मी आईटीआई में अभी वेल्डर, कंप्यूटर एंड प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, रेफ्रिजरेंशन एंड एयर कंडीशनिंग मैकेनिक, इलेक्ट्रानिक्स मैकेनिक, इलेक्ट्रिशयन और मैकेनिक मोटर व्हीकल कोर्स करवाए जा रहे हैं।
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कोट
आर्मी आईटीआई के लिए सेना कैंट में निशुल्क जमीन चाहती है। वैसे भी जितनी जमीन सेना कैंट में मांग रही है, उतनी जमीन यहां कैंट में उपलब्ध नहीं है। निशुल्क की तो बात ही दूसरी है। साहा के पास सेना की लगभग 23 एकड़ जमीन है। सेना वहां अपना आईटीआई बनवा सकती है। अब यदि प्रशासन कहीं जगह सेना की आईटीआई के लिए उपलब्ध भी करवाती है, तो वह जमीन निशुल्क कैसे मिल सकती है?
-शेखर विद्यार्थी, डीसी अंबाला-
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