अंबाला। रुक्मिणी देवी मेमोरियल हाल में रविवार को दी पोस्टल एंड आरएमएस इंप्लाइज कोआपरेटिव बैंक के अधिवेशन में जमकर बवाल हुआ। नौबत हाथापाई तक पहुंच गई। एक गुट ने दूसरे गुट पर भ्रष्टाचार और गबन का आरोप लगाते हुए बैनर और कुर्सियां फेंक दी और माइक उखाड़ दिए। हालात मारपीट तक पहुंच गई, जिसके चलते पुलिस को बुलाना पड़ा।
अधिवेशन में बैंक के मौजूदा पैनल को अपनी गतिविधियों, उपलब्धियों तथा योजनाआें को सामने रखना था। लेकिन अधिवेशन शुरू होते ही एक गुट ने मौजूदा गुट के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उसे भ्रष्ट तक कह दिया। इसी को लेकर दोनों गुट भिड़ गए। मामला इस कदर बिगड़ गया कि हाथापाई की नौबत आ गई। विपक्षी गुट तो इस कदर भड़क गया कि उसने हंगामा ही कर दिया।
जानकारी नहीं देने का आरोप
विपक्षी गुट का कहना है कि उन्होंने मौजूदा पैनल से कुछ मुद्दों पर जानकारी मांगी है, जो उपलब्ध नहीं करवाई जा रही है। इसी कारण से बैठक में हम चाहते हैं कि मंच से अपनी बात उठाये, लेकिन वर्तमान पैनल यह नहीं मान रहा। इसी कारण से विपक्षी गुट के सदस्य भड़के हैं और उन्होंने इस मांग को लेकर हंगामा किया।
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मौजूद पैनल का दावा, बैठक में एजेंडा पास
बैंक के मौजूदा पैनल का दावा है कि जो बैठक रविवार को प्रस्तावित थी, वह हुई है और एजेंडा पास कर लिया गया है। इस दौरान पूर्व चेयरमैन एचएस चंदेलकर सहित कई अन्य मौजूद रहे। बैठक में आडिट बैलेंस शीट व प्राफिट एंड लॉस अकाउंट 2012-13 को मंजूरी दी। लोन की सीमा 1.60 लाख से बढ़ाकर 2 लाख की गई। सीटीएस में आधे धन की अदायगी दो वर्ष बाद होगी, सीटीएस की राशि को 200 रुपये से बढ़ाकर 400 रुपए प्रतिमाह किया गया। डिविडेंट 8 प्रतिशत की दर से सदस्यों में बांटा जाएगा। सदस्य की सेवानिवृत्ति पर सम्मान राशि 1100 रुपये से बढ़ाकर 1500 रुपये की गई। 12 निदेशकों के पदों में से 2 पद महिलाओं के लिए और एक पद एससी अथवा एसटी वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।
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‘पिछले कई सालों से इसी तरह से विपक्षी गुट हंगामा कर रहा है। चुनावों में बैंक के सदस्य इनको नकार चुके हैं और आधारहीन आरोप लगा रहे हैं। गबन के जो भी आरोप लगाए जा रहे हैं, उनमें कोई तथ्य नहीं है। जिस तरह से आज हुई बैठक में मैन हैंडलिंग की गई, उसे लेकर बैठक बुलाई जाएगी और उसमें जो निर्णय होगा, उसके आधार पर आगामी कदम उठाया जाएगा।’
- मंजीत सिंह, चेयरमैन
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‘वर्तमान पदाधिकारी पूरी तरह से मनमानी पर उतारू हैं। इनके खिलाफ कई केस चल रहे हैं, जबकि करोड़ों का गबन इन लोगों ने किया है। मल्टी स्टेट एक्ट के तहत जानकारियां चाहते हैं, लेकिन वह भी नहीं दी जाती। अब कैसे कर्मचारियों के हितों की रक्षा करें, जबकि यह कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। हमें अपनी बात मंच से भी नहीं कहने देते।’
- एसपी गोयल, पूर्व निदेशक