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धार्मिक स्थल टैक्स के दायरे से बाहर क्यों

Ambala Updated Wed, 07 Aug 2013 05:36 AM IST
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अंबाला। जब बिजली विभाग और पानी विभाग धार्मिक स्थलों से मीटर लगाकर अपने बिल वसूलते हैं, तो कैंटोनमेंट बोर्ड इन धार्मिक स्थलों को हाउस टैक्स के दायरे से बाहर क्यों रखे हुए हैं। इन धार्मिक स्थलों को अभी तक हाउस टैक्स के दायरे में क्यों नहीं लाया गया। यह सवाल मंगलवार शाम को कैंटोनमेंट बोर्ड सदन की बैठक के दौरान बोर्ड प्रेसिडेंट और डिप्टी आर्मी कमांडर ब्रिगेडियर आशीष उप्पल ने प्रमुखता से उठाकर सदन को बहस के लिए एक अच्छा खासा मुद्दा दे दिया।
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उप्पल ने कहा कि यहां बहुत से धार्मिक स्थल है, जिनकी आय चढ़ावे के रूप में बहुत ज्यादा है। इन धार्मिक स्थलों की देखरेख के लिए गठित की गई सभाएं उस चढ़ावों को ले लेेती है, मगर जब हाउस टैक्स अदा करने की बात आती है, तो धार्मिक स्थल का हवाला देकर माफ करवा लिया जाता है। उनका कहना था कि भले ही दूसरे रिहायशी भवनों से कम दर पर ही सही, लेकिन धार्मिक स्थलों से हाउस टैक्स वसूलना चाहिए।
उप्पल की इसी बात को लेकर बिल्डिंग एंड हेल्थ कमेटी के चेयरमैन बिट्टू साहनी ने एतराज जताया। उन्होंने कहा कि पिछले 50 से भी ज्यादा सालों से ये धार्मिक स्थल हाउस टैक्स के दायरे से बाहर है। इसलिए ये नया प्रावधान लाया जाए। बिट्टू के साथ अन्य सदस्यों ने भी उनका समर्थन शुरू कर दिया। आखिरकार उप्पल ने बोर्ड सदस्यों की भावनाओं का सम्मान रखते हुए केवल इसी वित्त वर्ष तक इस प्रस्ताव को टालने को कहा, लेकिन उन्होंने ये भी कहा कि बोर्ड सदस्य तब तक अपने वार्डों में धार्मिक स्थलों को अगले वित्त वर्ष में इसके लिए मानसिक रूप से तैयार कर दे।
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