गुड़गांव। श्री सनातन धर्म सभा रजिस्टर्ड गीता भवन मंदिर में राम और सीता जन्म का प्रसंग दिखाया गया। रामलीला की शुरुआत रावण-वेदवती संवाद से हुई।
पहले दृश्य में दिखाया गया कि वेदवती वन में भगवान विष्णु को पति रूप में पाने के लिए तपस्या कर रही होती हैं। तभी वहां से रावण गुजरता है। वेदवती को देख रावण उस पर मोहित हो जाता है। रावण विवाह का प्रस्ताव रखता है, लेकिन वेदवती इनकार कर देती है। इस पर रावण बल का प्रयोग करता है। रावण से बचने के लिए वेदवती भूमि में समा जाती हैं, लेकिन श्राप दे जाती हैं कि अगले जन्म में वह रावण के काल का कारण बनेंगी।
दूसरे दृश्य में राक्षसों से परेशान देवताओं ने विष्णु से फरियाद की। तीसरा दृश्य राजा दशरथ दरबार का रहा। राजा दशरथ दु:खी होकर कुलगुरु वशिष्ठ से पुत्र प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। वशिष्ठ उन्हें ऋषि शृंगि से पुत्रेष्टि यज्ञ कराने की सलाह देते हैं। यज्ञ पूरा होता है। राजा दशरथ की तीनों रानियां गर्भ धारण करती हैं। महल में उस समय उल्लास का माहौल बन जाता है जब माता कौशल्या के गर्भ से श्रीराम का जन्म होता है। राम जन्म के बाद सीता जन्म का दृश्य भी दिखाया गया।