गुड़गांव। दिल्ली में रोडवेज बसों के चालान से क्षुब्ध कर्मचारियों ने आंदोलन की चेतावनी दी है। आल हरियाणा रोडवेज वर्कर्स ज्वाइंट एक्शन कमेटी ने सरकार और विभाग को चेतावनी दी है कि अगर चालकों की परेशानी का सिलसिला खत्म नहीं हुआ तो कोई भी चालक-परिचालक दिल्ली रूट पर नहीं जाएंगे। कर्मचारियों का आरोप है कि दिल्ली में रोडवेज की बसों का बेवजह चालान किया जा रहा है। इसका भुगतान चालक को अपनी जेब से करना पड़ रहा है। इस बारे में ना तो रोडवेज और और न ही सरकार कोई संज्ञान ले रही है। दिल्ली गैंगरेप के बाद तो चालक-परिचालक दिल्ली जाने से कतराने लगे हैं।
ये हैं आरोप
कमेटी के जिला अध्यक्ष सुरेश यादव ने बताया कि प्रदेश तीन हिस्सों से दिल्ली से जुड़ा है। ऐसे में दिल्ली पुलिस के कर्मचारी बड़ी संख्या में रोडवेज बसों में सफर करते हैं। रोडवेज बसों में उनके मुफ्त सफर पर मनाही है। ऐसे में विभाग के निर्देश पर उनसे किराया वसूला जा रहा है। इसी बात का बदला पुलिस रोडवेज बसों का चालान कर ले रही है।
12 को करेंगे सीएम निवास का घेराव
सुरेश यादव ने कहा कि अपनी मांगों को लेकर रोडवेज के कर्मचारी 12 जनवरी को मुख्यमंत्री के निवास का घेराव करेंगे। दिल्ली में चालान पर पाबंदी या विभाग की ओर से भुगतान की मांग इसमें प्रमुख होगी।
गैंगरेप के बाद 50 से अधिक चालान
दिल्ली गैंगरेप की घटना के बाद रोडवेज बसों के 50 से अधिक चालान किए जा चुके हैं। इनमे अधिकांश चालान चालक की लापरवाही के हैं। पिछले दिनों काले शाीशे वाली दो वॉल्वो बसों को जब्त भी कर लिया गया है। सुपर्ददारी के बाद बस को छोड़ा गया है। सुरेश यादव ने कहा कि सुपर्ददारी भी चालक को अपनी जेब से करानी पड़ती है।
ऐसे हो रहे चालान
--बगैर स्टैंड के बस रोकने पर 1000 से 2000 रुपये तक
--ओवरटेक करने पर 1000 से 3000 तक
--हॉर्न बजाने पर 500 से 1000 तक
--डीटीसी बस को ओवरटेक कर सवारी बैठाने और उतारने पर 1000 से 3000 तक
--ऐसे ही कुछेक और बिंदु है जिन पर चालक की लापरवाही बताकर चालान किया जा रहा है।
पर्दे हटाए, शीशे भी हटेंगे
रोडवेज के जीएम यशेंद्र सिंह ने कहा कि वॉल्वो बसों के पर्दे हटा दिए गए हैं। जल्द ही शीशों पर लगी काली फिल्म भी हटा ली जाएगी। उन्होंने कहा कि तकनीकी गलती के चालान का भुगतान विभाग ही करता है, लेकिन चालक की गलती से हुए चालान का भुगतान चालक की ओर से करने के ही निर्देश है। चालकों से आग्रह है कि किसी प्रकार की लापरवाही न करें। जल्दी ही इस बारे में विभाग के उच्चाधिकारियों से बात की जाएगी।