जिले के तापमान में गिरावट लगातार जारी है। रविवार को हिसार में न्यूनतम तापमान -0.8 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम तापमान 20.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विशेषज्ञ डॉ. रामनिवास ने बताया कि एक सप्ताह के दौरान मौसम परिवर्तनशील रहेगा और शीत लहर चलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि पहाड़ों पर बर्फ और शीत लहरों के कारण सर्दी बढ़ती रहेगी। पारा लुढ़कने के कारण रविवार को जिले में जन जीवन अस्तव्यस्त हो गया। छुट्टी होने के कारण लोग घरों में दुबके नजर आए।
वहीं नारनौल में रविवार को न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। रविवार इस मौसम का सबसे ठंडा दिन रहा। ठंड का असर ग्रामीण क्षेत्र में ज्यादा देखा गया। रविवार को क्षेत्र का अधिकतम तापमान 16.5 डिग्री दर्ज किया गया। ेग्रामीण क्षेत्र में ठंड के कारण खुले में बर्तनों में रखे पानी पर करीब एक से दो इंच मोटी परत जम गई। इसके अलावा खुले मैदान में चारों ओर दूर-दूर तक बर्फ की सफेद चादर दिखाई दे रही थी। करीब नौ बजे धूप खिलने पर लोगों को थोड़ी राहत मिली।
उत्तरी भारत के पहाड़ी क्षेत्र में हो रही बर्फबारी से नारनौल और आसपास के क्षेत्र में लगातार पारा गिरने एवं सर्द हवा के चलने ने किसानों के होश उड़ गए हैं। रविवार सुबह खेतों में खड़ी फसलों पर जमीं बर्फ से किसान खासे चिंतित हैं। बारानी फसलों पर ठंड का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। हालांकि, कृषि विभाग के अनुसार फिलहाल पड़ रही ठंड नुकसानदायक नहीं है, लेकिन यदि तापमान शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे जाता है तो फसलों को नुकसान हो सकता है।
मौसम विभाग के प्रतिनिधि रामचंद्र ने बताया कि रविवार सुबह का तापमान शून्य डिग्री दर्ज किया गया है। इसके चलते खुले मैदान व फसलों पर ओस की बूंदें बर्फ के रुप में जम गई हैं। अभी क्षेत्र में सरसों की फसल पर फली नहीं आई है। इस कारण नुकसान की संभावना बहुत कम है। यदि पारा और नीचे चला जाता है और ठंड लंबी होती है तो फसलों को जरूर नुकसान होगा।