पानीपत। शहर की तमाम मसजिदों के इमामों ने अंग्रेेेेजी फिल्म इनोसेंस को बेहूदा करार दिया और फिल्म के माध्यम से हजरत मोहम्मद की शान में की गई गुस्ताखी का पुरजोर विरोध किया। फिल्म निर्देशक व अभिनेता के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग के साथ-साथ माफी मांगने व भविष्य में इस प्रकार की गलती ना दोहराने की बात कही।
मानवाधिकार कार्यकर्ता मोमिन मलिक के नेतृत्व ने मुसलिम समाज के लोगों ने फिल्म को लेकर लघु सचिवालय में विरोध प्रदर्शन किया। मलिक ने कहा कि अंग्रेेजों को कोई ऐसा हक नहीं कि वे किसी भी धर्म के नाम या पैगंबर के प्रति गलत हरकत करें। उनके मंसूबाें को कामयाब नहीं होने दिया जाएगा।
मलिक ने कहा कि भारत की राष्ट्रपति द्वारा इस फिल्म की निंदा करने पर सभी उनका धन्यवाद करते हैं। उन्होंने बताया कि जिन लोगों ने हजरत की जीवनी को पढ़ा है, वे जानते हैं कि हजरत मोहम्मद साहब कैसे रहमदिल थे और हर समय दूसरों की मदर करने वाले थे। जिन लोगों ने इस्लाम धर्म की शिक्षाआें को नहीं अपनाया था, वो उन लोगों के साथ खुद भी अच्छा व्यवहार करते थे और दूसरों को भी अच्छा व्यवहार करने का हुक्म देते थे। अगर कोई हकीकत जानना चाहता है तो हजरत साहब की जीवनी पढ़े।
हिंदू समुदाय भी हुआ शामिल
हिंदू समुदाय के लोगाें ने भी हजरत मोहम्मद साहब के प्रति अशोभनीय और अव्यवहारिक फिल्म बनाए जाने के विरोध में मुसलिम समाज के लोगों ने भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि अंग्रेजों की चाल हिंदू और मुसलिम समाज के लोगों में खाई पैदा करने की है। इस अवसर पर सन्नी सैनी, राजबीर कश्यप, हनीफ कुरैशी, हाफिज वकील, हाफिज महमूद, मो. नौशाद, जहूर अंसारी, मौलाना नसीम, मुक्ती दाउद, मौलवी इसराइल, हाफिज शरीफ, कोच रामा अंसारी और शराफत हाफिद जावेद समेत मौजूद थे।