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आयुर्वेद बनेगा अब एड्स बचाव का सहारा

Karnal Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
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करनाल। साइलेंट किलर मानी जाने वाली एड्स की बीमारी से अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यकता है तो उसके भय को रोगी के दिल से निकालने की। ऋषि मुनियाें के देश भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद का जिक्र हो जाए तो एड्स नामक कोई बीमारी नहीं होती। इसी पद्धति के अनुसार अब एड्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने एचआईवी पीड़ित लोगों को इस बीमारी के भय से बाहर निकालने के लिए वेबसाइट तैयार करने का काम प्रारंभ किया है। लोगों को सेवा देने के लिए वेबसाइट अगले करीब छह महीने में अपना काम पूरी तरह से आनलाइन शुरू कर देगी।
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इस वेबसाइट पर आयुर्वेद पद्धति के अनुरूप एड्स की बीमारी क्या, क्यों होती है बीमारी, क्या है लक्षण और उपचार की पद्धति समेत तमाम बारीकियां शामिल की जाएगी। इस काम को अंजाम देने के लिए एम्स से रिफ्लेक्सोलॉजी में पीएचडी कर चुकी डा. श्वेता चौधरी समेत पांच लोगों की टीम गठित की जा चुकी है। एड्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया की ओर से घरौंडा क्षेत्र में एर्क इंट भट्ठे पर काम करने वाली बिहार की रहने वाली महिला और उसके पति को उपचार दे चुकी है। इस महिला को गलती से एचआईवी संक्रमित खून चढ़ाया जाने के बाद महिला और उसका पति इस बीमारी की चपेत में आ गए थे। बाद में इस दंपति ने बीमारी के चलते अपनी चार संतान खोई। एड्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया के बैनर तले काम करने वाले वैद्यों के जरिए उन्हें उपचार दिया गया। उपचार के बाद उनकी एक बच्ची हुई, जो अब करीब दो साल की है। वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसे मां का दूध कतई नहीं पिलाने दिया गया। बच्ची सामान्य बच्चों की तरह खेेलती कूदती है। उसे समय पर बचाव के लिए दवा जरूर दी जा रही है।
आयुर्वेद से करते हैं इलाज
इस संस्था ने वर्ष 1999 में एचआईवी के मरीजों का उपचार करना प्रारंभ किया था। अब तक निरंतर काम किया जा रहा है। बिना किसी शुल्क और पैसे के ऐसे रोगियों को फ्री उपचार दिया जाता है। उनका उपचार आयुर्वेद पद्धति के अनुसार दिया जाता है। वह लोग सरकारी प्रयोगशालाओं या फिर हाई फाई स्टैंडर्ड की प्रयोगशाला की रिपोर्ट को आधार मान कर काम करते हैं। वह लोग अपने उपचार के बाद रोगियों को स्वस्थ कर चुके हैं। यह पूरी जानकारी भी आन लाइन की जाएगी। केवल रोगियों की पहचान गुप्त रखी जाएगी। आंकड़ों का पूरा विवरण विस्तार से किया जाएगा।
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आयुर्वेद एड्स को नहीं मानता बीमारी
एड्स ट्रस्ट ऑफ इंडिया के निदेशक डा. केपी सिंह के अनुसार पांच लोगों की टीम में डा. श्वेता चौधरी, वैद्य लक्ष्मण दत्त कौशिक, नानक चंद भाटिया, वह स्वयं तथा एक संयासी को शामिल किया गया है। वह लोग अब तक एकत्रित किए गए अपने सभी अनुभवों के आधार पर आए सकारात्मक परिणामों को आनलाइन पर विस्तार रूप देंगे। वह लोग अब तक बहुत लोगों का उपचार कर चुके हैं। यह पूरा जिक्र सिलसिलेवार होगा। आयुर्वेद के अनुसार यह कोई बीमारी नहीं होती। कोई एचआईवी पॉजिटिव हो जाए तो उसके लिए बीमारी से अधिक समाज और परिवार का बहिष्कार अधिक खतरनाक होता है। लोगों को ऐसे लोगों को हेय दृष्टि से देखने के बजाए उन्हें सहारा दिया जाना चाहिए। इस बीमारी को शर्म के मारे छिपाए रखने की जरूरत नहीं है। समय पर उपचार कराया जाना चाहिए।
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