कुरुक्षेत्र। अगर सूर्य नमस्कार सोमवार को ब्रह्म सरोवर पर होता तो इतिहास में एक और अनूठा अध्याय जुड़ सकता था। सूर्य नमस्कार कार्यक्रम के आयोजकों ने इस सरोवर पर आयोजन के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं दी गई। लिहाजा ऐेतिहासिक और पौराणिक सरोवर नए एतिहास से चूक गया। वह भी ऐेसे पावन मौके पर जब धर्मनगरी में सूर्य भगवान का प्रकटोत्सव (जयंती) का अवसर था। कुरुक्षेत्र में सूर्यदेवता की विशेष पूजा का महत्व है। यहां सूर्यमंदिर, सूर्यकुंड, सूर्यद्वार है और सूर्यग्रहण जैसे खास मौकों पर धर्मक्षेत्र में विशेष स्नान का धार्मिक महत्व भी है। ऐेसे में स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष की स्मृति में आयोजित किए जा रहे सूर्य नमस्कार की अनुमति ब्रह्म सरोवर पर न देना बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। आयोजकों में केडीबी से इस कार्यक्रम के लिए अनुमति मांगी थी, लेकिन आयोजन के लिए एनओसी नहीं मिली, इससे आयोजक खिन्न है। केडीबी कार्यालय सचिव राजीव शर्मा ने बताया कि ये ऊपरी स्तर का मामला है, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है।
राष्ट्रपति ने फहराया था दुनिया का सबसे बड़ा तिरंगा
महामहिम राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल ने आठ फरवरी 2012 को ब्रह्म सरोवर पर 206 फुट ऊंचे राष्ट्रीय ध्वज को फहराया था। यह विश्व का सबसे बड़ा तिरंगा है। इस तिरंगे को देखने के लिए दूरदराज से लोग ब्रह्म सरोवर पहुंचते है। यह तिरंगा फ्लैग फाउंडेशन ऑफ इंडिया की ओर से स्थापित किया गया था। वहीं, ब्रह्म सरोवर विश्व का सबसे बड़ा धार्मिक सरोवर है। इसकी लंबाई 1800+1600 फुट तथा चौड़ाई 1600 फुट है। अधिकतम गहराई 45 फुट (14 मीटर) है।
सूर्यग्रहण पर 15 लाख ने एक साथ लगाई थी डुबकी
अक्तूबर 2005 में सूर्यग्रहण मेले पर कुरुक्षेत्र के इस ब्रह्म सरोवर में एक साथ 15 लाख से अधिक श्रद्धालु डुबकी लगा चुके हैं। इससे पहले और बाद में हुए सूर्यग्रहण मेलों पर भी लाखों की संख्या में एक साथ इसके घाटों पर स्नान का उल्लेख मिलता है।