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‘कोर्ट के फैसले ने मुझे जन्मदिन का तोहफा दिया’

Karnal Updated Thu, 07 Mar 2013 05:32 AM IST
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कुरुक्षेत्र। छह मार्च 2008 को स्नेहिल का अपहरण और छह मार्च 2013 को ही उसके दोषियों को उम्रकैद की सजा, ये विचित्र संयोग कुरुक्षेत्र के हाईप्रोफाइल अपहरण केस के साथ बुधवार को जुड़ गया। वहीं, पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में कानून की पढ़ाई कर रहे स्नेहिल ने कहा कि फैसला आने के बाद मुझे पांच मार्च के मेरे जन्मदिन का एक खास तोहफा मिल गया है। उनके साथ जो अन्याय हुआ था, उस मामले में उन्हें न्याय मिला है और अपराधी तत्वों को सजा। स्नेहिल के मुताबिक उनका परिवार इस कानूनी लड़ाई को इसलिए भी लड़ना चाहता था ताकि दहशत का माहौल पैदा करने वालों को सबक मिल सके। घटनाक्रम से एक संयोग ये भी जुड़ा है कि पांच साल पहले जिस दिन यह घटना हुई थी तब स्नेहिल अंबाला की मुलाना यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष का छात्र था और पांच वर्ष बाद जब अदालत का फैसला आया तब स्नेहिल पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ में लॉ प्रथम वर्ष का विद्यार्थी है। अपहरण की घटना पांच वर्ष पहले कुरुक्षेत्र के नए बस अड्डे के निकट हुई थी। वारदात को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने दिल्ली से चोरी की गई कार का इस्तेमाल किया था। स्नेहिल के अपहरण करने और 70 लाख की फिरौती की इस घटना को तब गुप्त रखा गया था। वारदात का शिकार स्नेहिल हरियाणा के एकमात्र शक्तिपीठ श्रीदेवीकूप भद्रकाली मंदिर के पीठाध्यक्ष का पुत्र है। हालांकि हरियाणा पुलिस की टीम ने इस घटना में जिस साहस और चतुराई का परिचय दिया, वह भी एक मिसाल रहा, जिसके लिए कई मंचों पर उन्हें सम्मान भी मिला। हालांकि कानूनी प्रक्रिया के चलते उस समय यह मामला अदालत में विचाराधीन था। पीड़ित छात्र और परिवार का कहना है कि वारदात अंजाम देने वाले प्रभावशाली और आपराधिक पृष्ठभूमि के थे, जिसके चलते उन्हें कई बार जान से मारने की धमकियां मिली। लिहाजा परिवार के प्रत्येक सदस्य को हथियार रखने पर विवश होना पड़ा। पुलिस सुरक्षा भी लेनी पड़ी, लेकिन न्याय की इस जंग में उन्होंने पांव पीछे नहीं हटाए। पीठाध्यक्ष के मुताबिक जुर्म करने वालों के हौसले यहां तक बुलंद थे कि उन्होंने कोर्ट परिसर से लेकर उनके घर तक में आकर जान से मारने की धमकियां देनी शुरू कर दी थी। फोन पर भी अकसर धमकियां मिलती रही। हमले का भी प्रयास हुआ। पीठाध्यक्ष सतपाल शर्मा के मुताबिक मां भद्रकाली व देश की कानून व्यवस्था में उनकी गहरी आस्था और विश्वास है, जिसके चलते उन्हें न्याय मिला।
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बारह लोगों ने किया था अपहरण
स्नेहिल का अपहरण बारह लोगों ने किया था, जिसमें कुरुक्षेत्र पुलिस ने एक युवती को भी नामजद किया था, इनमें तीन उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं, जबकि एक युवक अंबाला के गांव उगाला का है, जबकि अन्य सभी आरोपी थानेसर के हैं। केस में गिरफ्तार किए गए 12 लोगों में से एक युवक यूपी के सहारनपुर के गांव सिसोनी के सरपंच का पुत्र नीरज था। पुलिस ने तब सरपंच के घर से ही स्नेहिल को बरामद किया था।

मां ने कहा, आठ दिन तिल-तिल मरे
पीठाध्यक्ष की पत्नी शिमला देवी के मुताबिक कोर्ट का फैसला उनके लिए महत्व रखता है। 5 से 14 मार्च 2008 तक आठ दिन उन्होंने मर-मरकर काटे हैं। उनके मुताबिक इन आठ दिन के दौरान पूरा परिवार स्नेहिल की चिंता में न जाने कितनी बार तिलतिल कर मरा।
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चौदह मार्च को छुड़वा लिया गया था
पांच मार्च 2008 को स्नेहिल अपहरण के अगले दिन परिजनों ने गुमशुदगी का मामला दर्ज कराया था, क्योंकि उस समय तक अपहरण के बारे में जानकारी नहीं मिली थी। अगले ही दिन अपहरण का पता लगा, जब तक स्नेहिल को अपहरणकर्ता यूपी ले जा चुके थे। आठ मार्च को ही परिजनों ने तत्कालीन कुरुक्षेत्र के एसपी अमिताभ ढिल्लो को फोन पर मिली धमकी की जानकारी दी, जिसके बाद पूरा आपरेशन चलाया गया और 14 मार्च को स्नेहिल को सुरक्षित बरामद किया गया।

इन अधिकारियों ने निभाई खास भूमिका
कुरुक्षेत्र के तत्कालीन एसपी और वर्तमान में दिल्ली सीबीआई के डीआईजी अमिताभ ढिल्लो, तत्कालीन अंडर ट्रेनिंग आईपीएस एवं वर्तमान में करनाल के एसपी शशांक आनंद, गुड़गांव सीआईए के वर्तमान प्रभारी यशवंत यादव, हवलदार धर्मवीर, रणबीर, सुभाष, दलजीत सिंह व सिपाही धर्मसिंह की खास भूमिका रही थी स्नेहिल को सुरक्षित वापिस लाने में।

कई दिन खेतों में बिताए पुलिस ने
स्नेहिल को वापस लाने के लिए यूपी में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान आईपीएस शशांक आनंद ने जहां कई दिन ढाबे पर बिताए, वहीं, अन्य स्टाफ भी ढाबों और खेतों में रहा था। गुड़गांव के प्रभारी यशवंत यादव के मुताबिक उस आठ दिन के दौरान स्पेशल टीम दिन ने गोबिंदगढ़, अंबाला, शाहाबाद, मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर में अभियान चलाया था।

छत्तीसगढ़ ट्रेन के साथ दौड़ाई थी गाड़ी
हिरासत में आए एक व्यक्ति ने पुलिस को गुमराह किया था कि स्नेहिल और अपहरणकर्ता छत्तीसगढ़ की गाड़ी में मिलेंगे और देवबंद से मेरठ जाने वाली इस ट्रेन के रास्ते में जो बड़ी लाइट होगी, वहां 70 लाख फेंकने होंगे, लेकिन ये झूठी खबर थी, क्योंकि ट्रेन में कोई नहीं था और पुलिस गाड़ी लेकर इस ट्रेन के पीछे मेरठ पहुंच गई थी।
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