कुरुक्षेत्र। मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय स्थित धरोहर हरियाणा संग्रहालय के दूसरे भाग का लोकार्पण किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि धरोहर संग्रहालय हरियाणा प्रदेश के इतिहास और विकास की सही मायने में धरोहर है। इस संग्रहालय में दिखाए गए हरियाणवी संस्कृति के पहलुओं को देखकर युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिलेगी। यह संग्रहालय भविष्य में हरियाणवी संस्कृति पर शोध केंद्र के रूप में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे पहले मुख्यमंत्री ने विधिवत रूप से दूसरे फेज़ का लोकार्पण कर हवन यज्ञ में भाग लिया और पूरे संग्रहालय का अवलोकन किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि धरोहर संग्रहालय के दूसरे चरण ने हरियाणा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है। इसके लिए कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय प्रशासन और तमाम कर्मचारी बधाई के पात्र हैं, जिन्होंने अतीत और भविष्य के पहलुओं को जीवंत करने का प्रयास किया है। धरोहर संग्रहालय में हरियाणवी संस्कृति के हर क्षण को दिखाने का प्रयास किया गया है। इसके बावजूद अभी हरियाणवी संस्कृति के और अधिक पहलुओं को दिखाने का प्रयास भविष्य में भी किया जाएगा। हरियाणा के राखीगढ़ी में भी मोहनजोदड़ो से भी पुरानी सभ्यता के अवशेष मिले हैं। सरकार ने इस जगह को दुनिया का सबसे सुंदर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल बनाने के लिए डेढ़ करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के धरोहर संग्रहालय को एक विशेष विज़न को लेकर तैयार किया गया है। आने वाली पीढ़ियां इससे सीख लेंगी। इस संग्रहालय में कुम्हार, लोहार आदि प्राचीन सभ्यता के कारीगरों के जीवंत दृश्यों को दिखाने का अनोखा प्रयास किया गया है। राज्य सरकार की तरफ से इस धरोहर संग्रहालय को करोड़ों रुपये की अनुदान राशि दी गई है। इसका और विस्तार करने और भव्य बनाने के लिए भविष्य में भी कभी धन की कमी नहीं आने दी जाएगी और इस संग्रहालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर का संग्रहालय बनाने का प्रयास किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने धरोहर संग्रहालय में दान करने वाले पूर्व डीआईपीआरओ देवराज सिरोहीवाल, राजकिशन नैन, विनोद कुमार, गुलशन कुमार, चंद्रकला, जोगेंद्र सिंह, पवन जुलाना, अशोक गर्ग, मास्टर संतलाल, रामकुमार, मास्टर राजेंद्र, चौधरी कपूर सिंह, डॉ. अशोक, रामपाल, सुखबीर सिंह, रामचंद्र पूनिया, नवरतन पांडे आदि को प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि इस धरोहर संग्रहालय की प्रशंसा को थोड़े शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने वीसी डॉ. डीडीएस संधू व क्यूरेटर डॉ. महासिंह पूनिया तथा उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि दुनिया में अनेकों संग्रहालय देखे, परंतु कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय का धरोहर संग्रहालय सबसे अनोखा साबित हुआ है। वीसी डॉ. डीडीएस संधू ने कहा कि इस संग्रहालय की नींव स्वतंत्रता सेनानी स्व. रणबीर सिंह हुड्डा ने 28 अप्रैल 2006 को रखी और द्वितीय चरण की नींव अक्टूबर 2007 में मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी आशा हुड्डा ने रखी। विश्वविद्यालय और हरियाणा प्रदेशवासियों का यह सौभाग्य है कि विकास पुरुष मुख्यमंत्री ने धरोहर दूसरे फेज़ का लोकार्पण किया है। इस प्रकार का संग्रहालय दुनिया के किसी भी विश्वविद्यालय में बनाए गए संग्रहालयों से अनोखा है। 8 सालों में 10 लाख पर्यटक इसका अवलोकन कर चुके हैं और करीब पांच हजार लोगों ने इस संग्रहालय पर शोध किया है। क्यूरेटर डॉ. महासिंह पूनिया ने कहा कि हरियाणा में इस प्रकार का संग्रहालय 1966 में ही बनना चाहिए था। मुख्यमंत्री के ही प्रयासों से वर्ष 2006 में इस संग्रहालय की नींव रखी गई थी। 50 देशों के प्रतिनिधि इस संग्रहालय का अवलोकन कर चुके हैं। हरियाणवी संस्कृति का संरक्षण करने में यह संग्रहालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रजिस्ट्रार प्रो. एमके जैन ने आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस मौके पर शाहाबाद के विधायक अनिल धंतौड़ी, हरियाणा भंडार निगम की चेयरमैन सुमिता सिंह, विधायक जिलेराम, मुख्यमंत्री के राजनैतिक सलाहकार प्रो. वीरेंद्र सिंह, पूर्व विधायक रमेश गुप्ता, साहिब सिंह सैनी, भोपाल भाटी, जयभगवान, सुभाष सुधा, आईजी बलबीर सिंह, डीसी मनदीप सिंह बराड़, एसपी राकेश आर्य, कुटा अध्यक्ष डॉ. एचके शर्मा, उपाध्यक्ष डॉ. संजीव शर्मा मौजूद थे।
नहीं देखा धरोहर जैसा संग्रहालय : जिंदल
सांसद नवीन जिंदल ने कहा कि धरोहर हमारी सभ्यता और संस्कृति की पहचान है। ‘मैं दुनिया भर में घूम चुका हूं, लेकिन धरोहर जैसा अनोखा संग्रहालय मुझे कहीं नहीं दिखा।’ कुरुक्षेत्र को ऐसी अनुपम भेंट पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. डीडीएस संधू को उन्होंने बधाई दी। सांसद ने शनिवार को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय परिसर में धरोहर पार्ट-2 के उद्घाटन अवसर पर कहा कि धरोहर में बेहद अनोखी चीजें हैं। हरियाणा की प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की अनोखी पहचान है। इससे कुरुक्षेत्र को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंच पर लाने में मदद मिलेगी।