तरावड़ी। शहर में कॉलेज बनाने की मांग जैसे-जैसे जोर पकड़ती जा रही है, वैसे-वैसे अब शहर के उद्योगपति सहयोग के लिए आगे आए हैं। नीलोखेड़ी विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़े कस्बे के साथ सबसे ज्यादा आबादी वाला शहर भी है। चावल निर्यात में यह शहर विश्व में ख्याति प्राप्त कर चुका है लेकिन कॉलेज जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं होने के कारण यहां के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से महरूम होना पड़ रहा है। जो सुविधा शहर को कम से कम दस साल पहले मिल जानी चाहिए थी, वह आज तक नहीं मिल पाई है। लोगों के अनुसार कमजोर राजनीतिक नेतृत्व के चलते यह शहर विकास के मामले में हमेशा उपेक्षित रहा है लेकिन अब शहर का हर व्यक्ति किसी भी कीमत पर कॉलेज की मांग को पूरा करवाने के लिए तैयार खड़ा है। कॉलेज के नाम पर शहर के उद्योगपतियों ने तन-मन-धन से सहयोग देने की बात कही।
दो सौ करोड़ रुपये देते हैं टैक्स
शहर के उद्योगपति लाला अनिल गुप्ता ने कहा कि तरावड़ी ऐतिहासिक शहर है और देश में सबसे बड़ा चावल निर्यातक होने के कारण शहर से हर साल दो सौ करोड़ का टैक्स सरकार को जाता है लेकिन इतना टैक्स देने के बाद तरावड़ी शहर विकास की दृष्टि से उपेक्षित है। उन्होंने कहा कि यदि हमारे शहर द्वारा दिए टैक्स का एक प्रतिशत भी शहर के विकास में लग जाए तो शहर पूरे देश में सबसे सुंदर शहर बन सकता है। राजनीतिक कमजोरी के कारण कस्बे के लोगों को अभी तक कॉलेज जैसी मूलभूत जरूरत से वंचित होना पड़ रहा है और कम आबादी वाले कस्बों में कई साल पहले ही कॉलेज बन गया है। उन्हाेंने कहा कि सरकार अपनी ओर से कॉलेज को मंजूरी दे, जिसके बाद हरसंभव सहायता करने के लिए वे तैयार हैं।
सीएम केवल मंजूरी दे, बाकी काम उद्योगपतियों का
चावल निर्यात में विश्व भर में अपना नाम कायम करने वाले लाला पंकज गोयल ने कहा कि शहर में कॉलेज बने और हमारे बच्चों को बेहतर शिक्षा शहर में ही मिले। इसके लिए वह अपनी ओर से किसी भी तरह की सहायता करने के लिए हर समय तैयार है। शहर में कॉलेज नहीं बना, इसमें हमारे राजनीतिक लोगों के प्रयासों में कमी रही, नहीं तो यह मांग कई साल पहले ही पूरी हो चुकी होती। मुख्यमंत्री एक बार केवल कॉलेज निर्माण को मंजूरी दे बाकी काम तो शहर के उद्योगपति करने के लिए तैयार हैं। कॉलेज न केवल तरावड़ी बल्कि साथ लगते सैकड़ों गांवों के हजारों बच्चों के जीवन में नई क्रांति ला सकता है।
उच्च शिक्षा से बनता है भविष्य
रिटायर शिक्षाविद जयभगवान जांगड़ा ने कहा कि बारहवीं तक की शिक्षा बच्चे को केवल अक्षर ज्ञान देती है लेकिन उच्च शिक्षा बच्चे का भविष्य बनाती है। इसलिए कॉलेज बनना शहर में अत्यंत जरूरी है ताकि जो बच्चे गरीब व अन्य दिक्कतों के कारण दूसरे शहरों में शिक्षा प्राप्त करने नहीं जा सकते, उन्हें शिक्षा मिले और शहर के युवाओं में छिपी कुछ प्रतिभाएं शहर व प्रदेश के नाम को रोशन करने के लिए आगे आ सकें। उच्च शिक्षा के अभाव के कारण ही आज समाज के युवा वर्ग में नशे जैसी बुरी लत फैल रही है, जो समाज के लिए काफी घातक है। जमीन होने के बावजूद शहर में कॉलेज नहीं बन रहा, यह उनकी राजनीतिक कमजोरी को उजागर करता है।