कैथल समेत प्रदेश भर के पट्टेदारों के लिए खुशी की खबर है। सरकार ने पट्टेदारों के कानूनी वारिसों को अगले 99 साल के लिए काबिज भूमि को फिर से पट्टे पर देने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाले पट्टेदारों और उनके कानूनी वारिसों को अगले 99 साल तक का पट्टा तीन चरणों में दिया जाएगा। इस फैसले से प्रदेश भर के पट्टेदारों को लाभ मिलेगा, वहीं कैथल और कुरुक्षेत्र जिले में हजारों पट्टेदार इससे लाभान्वित होंगे।
क्या है पट्टे पर भूमि का मामला
वर्ष 1947 में देश के बंटवारे के समय पाकिस्तान से आए हजारों लोगों को शामलात भूमि अलॉट की गई थी जो साझी जमीनें थीं और जहां जंगल थे। पाकिस्तान से आए लोगों ने इन जगहों को साफ करके कृषि योग्य बना दिया जिस पर लोग लगातार खेती करते रहे। इसके बाद इन जमीनों को आबाद करने के कारण इन्हें आबादकार पट्टेदार कहा जाने लगा। ये लोग पंचायत को पट्टे के लिए निर्धारित राशि जमा करवाते रहे लेकिन उन्हें अभी तक मालिकाना हक नहीं मिल रहा है, जिस कारण इन लोगों को हर समय पट्टेदार भूमि के छीनने का डर सताता रहता है। कैथल के गुहला-चीका, कुरुक्षेत्र के पिहोवा हलके में यह मामला प्रमुख राजनीतिक मुद्दा भी रहा है।
ये नियम और शर्तें
इस मामले में बड़ा खुलासा करते हुए जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश खौथ ने बताया कि हरियाणा सरकार के विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा अधिसूचना जारी की गई है। इसके अनुसार अब मूल पट्टेदार या उसके कानूनी वारिस शामलात भूमि 99 साला पट्टे पर लेने के पात्र होंगे। इसके लिए 24 सितंबर, 1986 की कट ऑफ तिथि निर्धारित की गई है। इस तिथि से पूर्व कोई भी पट्टेदार जो शामलात भूमि पर लगातार सात साल तक पट्टेदार रहा हो तथा उसका परिवार पंजाब ग्राम शामलात भूमि एक्ट 1961 से पूर्व भूमिहीन हो के साथ-साथ अन्य निर्धारित नियमों पर खरा उतरने वाले अगले 99 साल के लिए पट्टे के अधिकारी होंगे।
तीन चरणों में दिया जाएगा पट्टा
निर्देशों के अनुसार भूमि का पट्टा प्रारंभिक रूप से 33 वर्ष तक की अवधि तथा आगे इसे इतनी ही अवधि के लिए दो बार नवीनीकरण किया जाएगा। नवीनीकरण सहित पट्टा अवधि 99 वर्ष से अधिक नहीं होगी। डीडीपीओ ने बताया कि अधिसूचना के अनुसार मूल पट्टेदार के विधि वारिसों को मूल आवंटित भूमि में उनके हिस्से की सीमा तक ही भूमि का पट्टा प्रदान किया जाएगा। यह हिस्सा राजस्व कर्मचारियों द्वारा निर्धारित किया जाएगा। संबंधित उपमंडलाधीश द्वारा प्रति हस्ताक्षरित किया जाएगा। पट्टेदार को भूमि को पट्टे पर देने का अधिकार नहीं होगा। पट्टेदार प्रत्येक पांच वर्ष के बाद 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ 2000 रुपये एकड़ प्रति वर्ष की दर से पट्टा धनराशि का भुगतान करेगा।
छह महीने में करना होगा आवेदन
डीडीपीओ के अनुसार 13 दिसंबर के बाद अगले छह महीने तक पट्टेदारों को बीडीपीओ कार्यालय में आवेदन करना होगा। आवेदन के लिए निर्धारित प्रोफार्मा एवं अन्य कागजात, जमाबंदी, राजस्व रिकॉर्ड आदि प्रस्तुत करना होगा। इसके बाद बीडीपीओ द्वारा राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर आवेदन की जांच की जाएगी। इसके बाद सहायक कलेक्टर प्रथम श्रेणी (डीडीपीओ) को भेजा आवेदन जाएगा। उक्त अधिकारी की स्वीकृति मिलने के बाद बीडीपीओ आवेदन को ग्राम पंचायत को भेजेंगे। सब कुछ नियमानुसार मिलने पर डीडीपीओ की स्वीकृति से ग्राम पंचायत एवं पट्टेदार के बीच 33 साल के लिए पट्टे का अनुबंध हो जाएगा जो बाद में दो बार 33-33 साल के लिए नवीनीकरण होगा।
कैथल में हो चुके हैं खूनी संघर्ष
गुहला में घग्गर पार के गांवों अरनौली, बौपुर, चंडीगढ़ प्लॉट सहित दर्जनों गांवों में यह समस्या बनी हुई है। यहां जमीनों को लेकर कई बार खूनी संघर्ष भी हो चुका है। इन जमीनों से एक बार आबादकार पट्टेदारों को जबरन उजाड़ दिया गया था। फसलों पर बुलडोजर चलवा दिए गए थे।